֍:कृषि पाराशर ग्रंथ को किया याद§ֆ:
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “खाद्य और कृषि के बारे में हमारी परंपराएं और अनुभव हमारे देश जितना ही प्राचीन हैं. भारत की कृषि परंपरा में विज्ञान और तर्क को प्राथमिकता दी गई है. हमारे पास औषधीय प्रभाव वाले भोजन का सेवन करने का आयुर्वेदिक विज्ञान है. यह हमारे भारतीय समाज का हिस्सा रहा है. 2000 साल पहले, ‘कृषि पाराशर’ नामक एक ग्रंथ लिखा गया था, यह मानव इतिहास की धरोहर है.”
§֍:100 किलोमीटर में कृषि पद्धति बदल जाती है…§ֆ:पीएम मोदी नरेंद्र मोदी ने कहा, “भारत में आज भी हम छह ऋतुओं को ध्यान में रखकर योजना बनाते हैं. हमारे पास 15 कृषि जलवायु क्षेत्र हैं. अगर आप भारत में 100 किलोमीटर की यात्रा करते हैं, तो कृषि पद्धति बदल जाती है. यह विविधता भारत को विश्व की खाद्य सुरक्षा के लिए आशा की किरण बनाती है. आज, भारत एक फूड सरप्लस देश है जो दूध, मसालों और दालों का सबसे बड़ा उत्पादक है. एक समय में, भारत की खाद्य सुरक्षा एक वैश्विक चिंता थी, आज भारत वैश्विक खाद्य और पोषण सुरक्षा के लिए समाधान खोज रहा है.”§֍:डिजिटल फसल सर्वे §ֆ:पीएम मोदी ने डिजिटल फसल सर्वे को लेकर कहा कि भारत डिजिटल फसल सर्वे के लिए डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित कर रहा है. पीएम किसान सम्मान निधि के तहत सिर्फ 30 सेकंड में एक क्लिक से 10 करोड़ किसानों के बैंक खातों में पैसा ट्रांसफर किया जाता है. हमारे किसानों को वास्तविक समय की जानकारी मिलेगी और वे डेटा आधारित निर्णय लेने में सक्षम होंगे. §֍:कृषि मंत्री ने कही ये बात§ֆ:केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा, “प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत की कृषि क्षेत्र में विकास दर दुनिया में सबसे ऊपर रही है. भारत हमेशा सुरक्षित उत्पादन के बारे में चिंतित रहा है. भारत जैविक खेती पर जोर दे रहा है.”§नई दिल्ली स्थित एनएएससी कॉम्लेक्स में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को 32वें अंतर्राष्ट्रीय कृषि अर्थशास्त्री सम्मेलन का उद्घाटन किया. इसमें देश-विदेश से आए कृषि अर्थशास्त्रियों का पीएम मोदी ने स्वागत किया. उन्होंने कहा कि देश के लाखों किसानों की ओर से आप सभी का स्वागत है. समारोह को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “मुझे खुशी है कि 65 साल बाद भारत में इस तरह का सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है. आप सभी दुनिया के अलग-अलग देशों से यहां आए हैं. मैं भारत के 12 करोड़ किसानों, भारत की 3 करोड़ से अधिक महिला किसानों, देश के 3 करोड़ मछुआरों की ओर से आपका स्वागत करता हूं. आज आप उस देश में हैं जहां 550 मिलियन पशु रहते हैं. इस कृषि प्रधान और पशु प्रेमी देश में आप सभी का स्वागत है.”

