लोकसभा में लवु श्रीकृष्ण देवरायलु के एक अनसितारे प्रश्न के लिखित उत्तर में केंद्रीय जनजातीय कार्य राज्य मंत्री दुर्गादास उइके ने जानकारी दी कि प्रधानमंत्री जनजातीय विकास मिशन (PMJVM) के तहत राज्यवार और वर्षवार स्वीकृत अधोसंरचनात्मक सुविधाएं, जारी की गई राशि और उसके उपयोग का विवरण प्रस्तुत किया गया है।
PMJVM का उद्देश्य अनुसूचित जनजातियों के आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक सशक्तिकरण को सुनिश्चित करना है। इस मिशन के तहत देशभर में हाट बाजारों का आधुनिकीकरण, संग्रहण सुविधाओं का निर्माण, और जनजातीय शिल्प मेलों का आयोजन किया जा रहा है, जिससे आदिवासी समुदायों को मुख्यधारा की अर्थव्यवस्था से जोड़ा जा सके।
प्रमुख आंकड़े:
- ₹9138.69 लाख की कुल राशि विभिन्न राज्यों को जारी की गई।
- 1372 हाट बाजार, 639 संग्रहण सुविधाएं और 22 अन्य अधोसंरचनाएं स्वीकृत।
- ₹2335.21 लाख की धनराशि का उपयोग कार्यों के निष्पादन में किया गया।
राज्यों के प्रदर्शन की झलक:
- मध्यप्रदेश को ₹2681.25 लाख की राशि मिली और सबसे अधिक 235 हाट बाजारों का आधुनिकीकरण स्वीकृत हुआ।
- छत्तीसगढ़, गुजरात, उत्तर प्रदेश, ओडिशा, झारखंड, मणिपुर, और नागालैंड जैसे राज्यों में भी महत्वपूर्ण अधोसंरचना विकास हुआ।
- वर्ष 2024-25 में नागालैंड को विशेष रूप से ₹222.75 लाख स्वीकृत हुए हैं जिससे 36 हाट बाजार और 36 संग्रहण केंद्र विकसित किए जा रहे हैं।
TRIFED द्वारा आयोजित जनजातीय मेलों और प्रदर्शनियों की जानकारी:
पिछले दो वर्षों (2023-24 और 2024-25) में TRIFED द्वारा कुल 61 जनजातीय कारीगर मेले और 50 प्रदर्शनियों का आयोजन देशभर में किया गया। इन आयोजनों का उद्देश्य जनजातीय शिल्प, कला और संस्कृति का प्रचार-प्रसार करना और कारीगरों को बाजार से जोड़ना है।
प्रमुख आयोजन स्थल:
- आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, महाराष्ट्र, केरल, झारखंड, तमिलनाडु जैसे राज्यों में सबसे अधिक मेलों का आयोजन हुआ।
- दिल्ली, गुजरात, राजस्थान, उत्तराखंड, और ओडिशा में प्रदर्शनियों के माध्यम से जनजातीय उत्पादों को बढ़ावा मिला।
- लद्दाख, हिमाचल प्रदेश, तेलंगाना और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में भी वर्ष 2024-25 में नए आयोजन देखे गए।
मिशन के व्यापक प्रभाव:
- जनजातीय शिल्प और उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराना
- आदिवासी समुदायों की आय और रोजगार के अवसरों में वृद्धि
- पारंपरिक ज्ञान और सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण
PMJVM के माध्यम से सरकार का लक्ष्य है कि आदिवासी क्षेत्रों में स्थायी विकास, सांस्कृतिक संरक्षण, और आर्थिक आत्मनिर्भरता को सुनिश्चित किया जाए। यह मिशन प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास” के दृष्टिकोण को मजबूती से आगे बढ़ा रहा है।

