केंद्र सरकार द्वारा वर्ष 2016 में शुरू की गई प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) अब किसानों के लिए सुरक्षा कवच बनती जा रही है। साल दर साल योजना के अंतर्गत जुड़ने वाले किसानों की संख्या में बढ़ोतरी हो रही है। वर्ष 2024-25 में 4.19 करोड़ किसानों ने योजना के तहत पंजीकरण कराया, जो कि 2022-23 के 3.17 करोड़ की तुलना में 32% की वृद्धि दर्शाता है। यह योजना की शुरुआत के बाद से अब तक का सबसे अधिक पंजीकरण है।
सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, इस साल योजना में पंजीकृत किसानों में से 6.5% पट्टेदार किसान, 17.6% सीमांत किसान और 48% ऋणी किसान हैं, जो कि इस बात का संकेत है कि योजना अब समाज के हर वर्ग के किसानों तक पहुंच बना रही है।
बेहतर कार्यान्वयन के लिए उठाए गए ठोस कदम:
सरकार ने योजना को और प्रभावी, पारदर्शी और किसानहितैषी बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण पहलें की हैं:
- नेशनल क्रॉप इंश्योरेंस पोर्टल (NCIP) का विकास किया गया है, जिससे किसान सीधे ऑनलाइन पंजीकरण कर सकते हैं और दावा राशि सीधे उनके बैंक खाते में ट्रांसफर होती है।
- ‘डिजीक्लेम मॉड्यूल’ के माध्यम से क्लेम प्रक्रिया पारदर्शी और समयबद्ध हो गई है। यदि बीमा कंपनी समय पर भुगतान नहीं करती है तो 12% का जुर्माना स्वतः लगाया जाता है।
- केंद्र सरकार की सब्सिडी को राज्य सरकारों की सब्सिडी से अलग कर दिया गया है, जिससे किसानों को केंद्र के हिस्से की राशि समय पर मिल सके।
- खरीफ 2025 से सभी राज्य सरकारों के लिए ESCROW खाता खोलना अनिवार्य कर दिया गया है ताकि राज्य सरकार की प्रीमियम राशि पहले से जमा हो सके।
तकनीक के माध्यम से पारदर्शिता और सटीक आंकलन:
- CCE-Agri ऐप के जरिए फसल कटाई प्रयोग (CCE) के आंकड़े डिजिटल रूप से एकत्र किए जा रहे हैं और NCIP पर अपलोड किए जाते हैं।
- YES-TECH (टेक्नोलॉजी आधारित उपज अनुमान प्रणाली) के तहत धान, गेहूं और सोयाबीन फसलों में 30% उपज अनुमान रिमोट सेंसिंग डेटा पर आधारित किया गया है।
- WINDS प्रणाली के अंतर्गत देशभर में स्वचालित मौसम केंद्रों (AWS) और वर्षा मापकों (ARG) का नेटवर्क विकसित किया गया है, जिससे ग्राम पंचायत स्तर तक मौसम की सटीक जानकारी उपलब्ध हो रही है।
किसानों में जागरूकता के लिए अभियान:
- सरकार द्वारा ‘फसल बीमा सप्ताह’ और ‘फसल बीमा पाठशालाएं’ ग्राम पंचायत स्तर पर आयोजित की जा रही हैं।
- ‘मेरी पॉलिसी मेरे हाथ’ अभियान के तहत किसानों को बीमा पॉलिसी की हार्ड कॉपी ग्राम पंचायत में विशेष शिविरों के माध्यम से सौंपी जा रही है।
राज्यवार दावा बकाया स्थिति:
सरकार द्वारा 30 जून 2025 तक की स्थिति में पिछले पांच वर्षों के दावा बकाया आंकड़े भी साझा किए गए हैं। वर्ष 2024-25 में कुल ₹3,338.7 करोड़ के दावे लंबित हैं, जिसमें राजस्थान, मध्य प्रदेश और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में बकाया राशि अधिक है।
इस योजना के तहत सरकार की पहलें दर्शाती हैं कि वह किसानों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने के लिए गंभीर और प्रतिबद्ध है। आने वाले समय में तकनीक और पारदर्शिता के माध्यम से इस योजना को और प्रभावी बनाने का प्रयास जारी रहेगा।

