किसानों को उनकी उपज का लाभकारी मूल्य सुनिश्चित करने और उपभोक्ताओं को आवश्यक वस्तुएं सस्ती दरों पर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से केंद्र सरकार प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान (PM-AASHA) का एकीकृत रूप से क्रियान्वयन कर रही है। इस योजना में मूल्य समर्थन योजना (PSS), मूल्य स्थिरीकरण कोष (PSF), मूल्य अंतर भुगतान योजना (PDPS) और बाजार हस्तक्षेप योजना (MIS) शामिल हैं।
मूल्य समर्थन योजना (PSS) तभी लागू की जाती है जब किसी राज्य/केंद्र शासित प्रदेश की मांग पर अधिसूचित दालों, तिलहनों और नारियल (कोप्रा) के बाजार भाव, कटाई के चरम समय में, न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से नीचे गिर जाते हैं। इसका मुख्य उद्देश्य किसानों को औने-पौने दाम पर बिक्री से बचाना और MSP पर खरीद सुनिश्चित करना है। इस योजना के तहत राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ (NAFED) और राष्ट्रीय उपभोक्ता सहकारी संघ (NCCF) जैसी केंद्रीय नामित एजेंसियां, राज्य स्तरीय एजेंसियों के माध्यम से, केवल पूर्व-पंजीकृत किसानों से सीधे खरीद करती हैं, जिससे बिचौलियों की भूमिका समाप्त हो जाती है।
मूल्य स्थिरीकरण कोष (PSF) का संचालन उपभोक्ता मामले विभाग द्वारा किया जाता है, ताकि कृषि और बागवानी उत्पादों की कीमतों में उतार-चढ़ाव से उपभोक्ताओं को बचाया जा सके। इसके तहत सरकार अरहर, उड़द, चना, मूंग, मसूर और प्याज जैसे प्रमुख उत्पादों का बफर स्टॉक बनाती है और आवश्यकता पड़ने पर इन्हें बाजार में संतुलित तरीके से जारी करती है।
PSS और PSF का संयुक्त क्रियान्वयन किसानों को MSP पर खरीद की गारंटी और उपभोक्ताओं को स्थिर कीमत पर वस्तुएं उपलब्ध कराने का संतुलित समाधान देता है, जिससे किसान कल्याण और खाद्य मूल्य स्थिरता दोनों सुनिश्चित होती हैं।
किसानों की अधिक से अधिक भागीदारी के लिए NAFED का ई-समृद्धि और NCCF का ई-समुक्ति जैसे डिजिटल पोर्टल तैयार किए गए हैं। इन प्लेटफॉर्म पर किसान आधार नंबर, भूमि रिकॉर्ड, बैंक विवरण और फसल की जानकारी देकर पंजीकरण कर सकते हैं। पंजीकृत किसान अपनी उपज बेचने के लिए नजदीकी खरीद केंद्र चुन सकते हैं और निर्धारित तिथि पर उपज लेकर आ सकते हैं। यह प्रणाली MSP भुगतान सीधे किसानों के बैंक खाते में स्थानांतरित करती है, जिससे देरी और बिचौलियों की समस्या समाप्त हो जाती है।
सरकार इस योजना के तहत, खरीद सीजन शुरू होने से पहले ही, राज्य सरकारों और एजेंसियों के माध्यम से व्यापक जागरूकता अभियान चलाती है, ताकि किसान समय पर पंजीकरण कर लाभ उठा सकें।

