पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (PAU) के अर्थशास्त्र एवं समाजशास्त्र विभाग द्वारा “प्राथमिक आंकड़ों की शक्ति को उजागर करना” विषय पर दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन सफलतापूर्वक किया गया। इस कार्यशाला का उद्देश्य शोधार्थियों की फील्ड आधारित अनुसंधान और प्राथमिक आंकड़ों के संग्रहण की व्यावहारिक क्षमताओं को मजबूत करना था।
इस कार्यशाला में विभाग के 25 एम.एससी. और पीएच.डी. विद्यार्थियों ने भाग लिया। कार्यशाला की शुरुआत जगराओं स्थित पोना गांव की फील्ड विजिट से हुई, जहां छात्रों ने किसानों का साक्षात्कार लेकर प्राथमिक आंकड़े एकत्रित करने का प्रत्यक्ष अनुभव प्राप्त किया। इस दौरान प्रतिभागियों ने शैक्षणिक प्रशिक्षण और जमीनी हकीकत के बीच की दूरी को पाटते हुए वास्तविक समय में डेटा संग्रहण और समुदाय से संवाद करना सीखा।
विभागाध्यक्ष डॉ. जे.एम. सिंह ने प्राथमिक आंकड़ों के महत्व पर आधारित एक विचारोत्तेजक व्याख्यान प्रस्तुत किया, जिसमें उन्होंने बताया कि किसी भी सामाजिक व आर्थिक शोध में सटीक और व्यवस्थित डेटा की कितनी अहम भूमिका होती है।
इसके अलावा, बठिंडा स्थित क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र से डॉ. जी.एस. रोमाना ने प्राथमिक आंकड़ों के संग्रहण की प्रक्रिया पर गहन और विशेषज्ञ व्याख्यान दिया, जो प्रतिभागियों के लिए बेहद ज्ञानवर्धक सिद्ध हुआ।
कार्यक्रम की कोऑर्डिनेटर डॉ. संगीता रंगुवाल और डॉ. हरसिमरनजीत कौर मावी ने दो दिनों तक विभिन्न विषयों जैसे कि डेटा संग्रहण की प्रक्रिया, प्राथमिक डेटा के स्रोत और प्रकार, सैंपलिंग की प्रासंगिकता, सर्वेक्षण डिज़ाइन, और सर्वोत्तम शोध पद्धतियों पर विस्तृत सत्र आयोजित किए।
कार्यशाला के इंटरैक्टिव सत्रों में विद्यार्थियों ने डेटा संग्रहण से जुड़े व्यवहारिक और नैतिक पहलुओं, मेथडोलॉजी की समझ, और फील्ड रिसर्च में आने वाली चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा की। इन सत्रों ने प्रतिभागियों को न केवल आंकड़े जुटाने की तकनीकी जानकारी दी, बल्कि समुदाय से जुड़ाव और सहभागिता की समझ को भी गहरा किया।
इस सफल आयोजन के माध्यम से PAU ने एक बार फिर यह साबित किया कि वह न केवल कृषि अनुसंधान में अग्रणी है, बल्कि सामाजिक विज्ञान के क्षेत्र में भी गुणवत्तापूर्ण और व्यावहारिक शिक्षा प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है।

