पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (PAU) के कौशल विकास केंद्र द्वारा आयोजित पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम “एग्रीबिजनेस की स्थापना” में विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों से आह्वान किया कि वे ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका को सशक्त और टिकाऊ बनाने के लिए एग्रो-प्रोसेसिंग कॉम्प्लेक्स (APCs) की स्थापना करें। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम विश्वविद्यालय के प्रसंस्करण एवं खाद्य अभियांत्रिकी विभाग के सहयोग से डॉ. एमएस भुल्लर, निदेशक (विस्तार शिक्षा) के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया।
डॉ. रुपिंदर कौर, एसोसिएट डायरेक्टर (कौशल विकास) ने कहा कि
“किसानों की सोच को केवल खेती तक सीमित रखना अब पर्याप्त नहीं है। खेती के साथ-साथ प्रसंस्करण जैसे आय के वैकल्पिक स्रोतों को अपनाना आज के समय की आवश्यकता है।”
कोर्स समन्वयक डॉ. कुलवीर कौर ने कहा कि
“खाद्य प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन न केवल आर्थिक दृष्टि से लाभकारी है, बल्कि यह रोजगार सृजन में भी अहम भूमिका निभाता है।”
प्रशिक्षण में विशेषज्ञों द्वारा दी गई विस्तृत जानकारी:
प्रशिक्षण के दौरान PAU के विशेषज्ञों डॉ. एमएस आलम, डॉ. प्रीतिंदर कौर, डॉ. गुरवीर कौर, डॉ. सतीश कुमार गुप्ता, डॉ. गुर्नाज़ सिंह गिल, डॉ. मनिंदर कौर, डॉ. मनप्रीत कौर सैनी, डॉ. सतीश कुमार, डॉ. रोहित शर्मा, डॉ. गगनदीप कौर सिद्धू, डॉ. खुशदीप धारनी, डॉ. देविंदर तिवारी और डॉ. प्रेरणा कपिला — ने APC की स्थापना, आवश्यक मशीनें, और आर्थिक लाभों पर व्यापक जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि गेहूं, चावल, दालें, तिलहन, शहद और गुड़ आधारित उत्पादों के लिए प्रसंस्करण, मिलिंग, ग्राइंडिंग, पैकेजिंग और लेबलिंग जैसी प्रक्रियाएं कैसे की जाती हैं और ये कैसे आम किसानों को अतिरिक्त आय का साधन बन सकती हैं।
प्रमाणन, ऋण और सब्सिडी पर चर्चा
AGMARK प्रयोगशाला के प्रभारी डॉ. मन्मीत मानव और इंडियन बैंक के डॉ. चंदन ठाकुर ने प्रतिभागियों को प्रमाणन, बैंक ऋण एवं सरकारी सब्सिडी की जानकारी दी, जिससे वे आसानी से APC की स्थापना कर सकें।
प्रशिक्षण के अंतर्गत प्रतिभागियों को लखोवाल स्थित एग्रो-प्रोसेसिंग कॉम्प्लेक्स का भ्रमण भी करवाया गया, जिसकी समन्वय डॉ. प्रीति और डॉ. किरणदीप ने की।
कार्यक्रम का समापन कंवलजीत कौर के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। प्रशिक्षण में 45 किसानों और ग्रामीण महिलाओं ने भाग लेकर एग्रीबिजनेस के नए अवसरों के बारे में जानकारी प्राप्त की।

