ֆ:इस अभियान के तहत महज़ मिट्टी के पानी के पात्र लगाने तक ही सीमित न रहते हुए, हर एनएसएस स्वयंसेवक ने एक पात्र को अपनाया है और उसे नियमित रूप से भरने की व्यक्तिगत जिम्मेदारी ली है, जिससे यह प्रयास लगातार और टिकाऊ बना रहे। इस करुणामयी पहल की प्रेरणा डॉ. निर्मल जौरा, निदेशक, छात्र कल्याण, पीएयू द्वारा दी गई है। उन्होंने छात्रों को पर्यावरणीय संवेदनशीलता और जीवों के प्रति करुणा का संदेश देते हुए कहा, “गर्मी में जीवों की सेवा करना ‘सेवा’ और ‘दया’ के सिद्धांतों का सजीव उदाहरण है, जो ईश्वर की हर रचना की देखभाल करने का संदेश देते हैं।”§ֆ:इस अभियान में 55 से अधिक एनएसएस स्वयंसेवक भाग ले रहे हैं। एनएसएस कार्यक्रम अधिकारियों डॉ. रुपिंदर पाल सिंह और डॉ. गगनदीप कौर ने बताया कि यह पहल न केवल पक्षियों को राहत देती है, बल्कि छात्रों के भीतर करुणा, जिम्मेदारी और सामाजिक सेवा की भावना को भी प्रबल करती है, जो एनएसएस के मूल मूल्यों से मेल खाती है।§ֆ:इस अभियान की संकल्पना एनएसएस समन्वयक डॉ. हरमीत सिंह सरालच और संयुक्त निदेशक, छात्र कल्याण डॉ. कमलजीत सिंह सूरी के मार्गदर्शन में की गई, जिन्होंने इसे पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक उत्तरदायित्व की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।§पंजाब में बढ़ती गर्मी और तपती धूप को देखते हुए पंजाब एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी (पीएयू) के कॉलेज ऑफ एग्रीकल्चरल इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (सीओएईटी) की एनएसएस इकाई ने एक सराहनीय पहल की शुरुआत की है। “विंग्स ऑफ केयर – बर्ड्स हाइड्रेशन इनिशिएटिव” नामक इस अभियान का उद्देश्य गर्मी के मौसम में जल संकट झेल रहे पक्षियों को राहत पहुंचाना है।

