ֆ:बैठक में जल संरक्षण, बागवानी फसलों की खेती, मशरूम उत्पादन, किण्वित खाद्य व पेय पदार्थ, खाद्य प्रसंस्करण व मूल्य संवर्धन, पुष्प सज्जा आदि विषयों पर विशेष चर्चा की गई।इस अवसर पर डॉ. गोसल ने कहा, “जब आज का युग आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटल मीडिया की ओर अग्रसर है, तब भी एक पुस्तक की अपनी अलग ही अहमियत होती है। पीएयू न केवल इंटरनेट आधारित सूचना देने में अग्रणी है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट से वंचित किसानों तक प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और सोशल मीडिया के माध्यम से जानकारी पहुंचाने का निरंतर प्रयास कर रहा है।”§ֆ:उन्होंने कम्युनिकेशन सेंटर की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह केंद्र कृषि तकनीकों के प्रसार, डिजिटल समाचार पत्र ‘खेती संदेश’, मौसम आधारित कृषि सलाह व्हाट्सएप समूहों के माध्यम से किसानों को लगातार जागरूक कर रहा है। साथ ही, डॉ. गोसल ने हाइड्रोपोनिक्स तकनीक पर भी साहित्य प्रकाशित करने का सुझाव दिया, जो कृषि डिजिटलीकरण के दौर में तेजी से उभर रही है।§ֆ:कार्यक्रम का संचालन करते हुए डॉ. टी.एस. रियार, अतिरिक्त निदेशक (संचार) ने पिछली बैठक की कार्रवाई रिपोर्ट और नए प्रकाशनों का एजेंडा प्रस्तुत किया। उन्होंने यह भी बताया कि पीएयू की कृषि पत्रिकाओं की बिक्री और सब्सक्रिप्शन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जो किसानों के बीच इन प्रकाशनों की लोकप्रियता को दर्शाता है।§ֆ:ऋषि पाल सिंह, कुलसचिव ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत करते हुए कहा कि “कम्युनिकेशन सेंटर ने राज्य के कोने-कोने में बसे किसानों तक जो पहुंच बनाई है, वह पीएयू पर किसानों के विश्वास का प्रमाण है।”कार्यक्रम के अंत में, सूक्ष्मजीव विज्ञान विभाग के छात्रों द्वारा तैयार की गई किण्वित चाय पेय ‘कंबूचा’ को अतिथियों द्वारा सराहा गया और उसकी विशेष रूप से प्रशंसा की गई।§
पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (PAU), लुधियाना द्वारा प्रकाशन समिति की बैठक का आयोजन किया गया, जिसकी अध्यक्षता कुलपति डॉ. सतबीर सिंह गोसल ने की। इस बैठक में विश्वविद्यालय के वरिष्ठ अधिकारी, विभागाध्यक्ष और प्रतिष्ठित कृषि लेखक उपस्थित रहे। बैठक में किसानों की बदलती आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए नए प्रकाशनों के एजेंडे पर विचार-विमर्श किया गया।

