ֆ:SDSU में डॉ. धांडा स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर पर वीड साइंस विषय पढ़ाएंगे और मक्के, सोयाबीन और गेहूं जैसी प्रमुख फसलों पर आधारित वीड इकोलॉजी, बायोलॉजी और एकीकृत वीड प्रबंधन रणनीतियों पर केंद्रित एक सक्रिय शोध कार्यक्रम का नेतृत्व करेंगे। वे बहु-राज्यीय शोधकर्ताओं, सरकारी एजेंसियों और किसानों के साथ मिलकर क्षेत्रीय वीड प्रबंधन से जुड़ी चुनौतियों पर काम करेंगे और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से समाधान प्रस्तुत करेंगे।§ֆ:पीएयू के कुलपति डॉ. सतबीर सिंह गोसल ने डॉ. धांडा को इस महत्वपूर्ण उपलब्धि पर बधाई देते हुए कहा, “पीएयू को अपने पूर्व छात्र पर गर्व है। हम SDSU के साथ सहयोग की आशा रखते हैं ताकि वीड साइंस में ठोस योगदान दिया जा सके और कृषि समुदाय के लिए प्रभावशाली समाधान प्रस्तुत किए जा सकें।”§ֆ:डॉ. एम.आई.एस. गिल, डीन, स्नातकोत्तर अध्ययन, और डॉ. हरिराम, प्रमुख, एग्रोनॉमी विभाग, पीएयू ने भी डॉ. धांडा को शुभकामनाएं दीं और विश्वास जताया कि भविष्य में दोनों संस्थानों के बीच उपयोगी शोध सहयोग स्थापित होंगे। यदि आप इसे किसी समाचार पत्र के लिए विशेष प्रारूप में या सोशल मीडिया के लिए तैयार करवाना चाहते हैं तो बताएं।§डॉ. धांडा ने 2024 में कैनसस स्टेट यूनिवर्सिटी, मैनहैटन, कैनसस से वीड साइंस में पीएच.डी. प्राप्त की। इससे पहले उन्होंने 2020 में पीएयू, लुधियाना से एग्रोनॉमी में एम.एससी. तथा 2018 में चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय (CCSHAU), हिसार से बी.एससी. एग्रीकल्चर की डिग्री प्राप्त की। उन्होंने मिनेसोटा विश्वविद्यालय में पोस्टडॉक्टोरल शोध करके अपने ज्ञान में और भी निखार लाया।डॉ. धांडा को अब तक 40 से अधिक पुरस्कार और छात्रवृत्तियाँ प्राप्त हो चुकी हैं, जिनमें इम्पैक्टफुल रिसर्च अवॉर्ड (मिनेसोटा विश्वविद्यालय) और आउटस्टैंडिंग ग्रेजुएट स्टूडेंट अवॉर्ड (वीड साइंस सोसाइटी ऑफ अमेरिका) जैसे प्रतिष्ठित सम्मान शामिल हैं। उन्होंने अब तक 25 शोध पत्र प्रकाशित किए हैं।

