पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान रविवार को किसी औपचारिक मंच या सरकारी दफ्तर में नहीं, बल्कि गांव की एक छांव में ग्रामीणों के बीच नज़र आए। लुधियाना जिले के ओटालां और लिबड़ा गांव में पहुंचे मुख्यमंत्री ने खेतों में बैठकर किसानों से खुलकर बातचीत की, उनकी समस्याएं सुनीं और ‘रंगला पंजाब’ बनाने के लिए सुझाव भी मांगे।
इस मुलाकात में न तो सोफे थे, न ही कोई सरकारी तामझाम। सीएम ने सीधे तौर पर गांव वालों से संवाद करते हुए उन्हें राज्य सरकार की नीतियों और बदलावों की जानकारी दी।
बिजली और नहर की बेहतर स्थिति
मुख्यमंत्री मान ने बताया कि जब उन्होंने सत्ता संभाली थी, तब केवल 21% किसान ही नहर के पानी से सिंचाई कर पाते थे। लेकिन सरकार की कोशिशों से यह आंकड़ा अब 63% तक पहुंच गया है। गांवों के आखिरी छोर तक नहर और नदी का पानी पहुंचाया गया है, जिससे खेतों में हरियाली लौट आई है।
धान की बुवाई पहले क्यों कराई?
सीएम ने बताया कि इस बार धान की बुवाई 15 दिन पहले शुरू कराई गई है, ताकि अक्टूबर की नमी के दौरान फसल बेचने में होने वाली दिक्कतों से बचा जा सके। इसके लिए राज्य सरकार ने क्षेत्रवार बुवाई का नया सिस्टम लागू किया है।
फसल खरीद के लिए केंद्र से की अपील
मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि उन्होंने केंद्रीय खाद्य मंत्री को फोन कर धान की खरीद 15 सितंबर से शुरू करने की अपील की है। इससे किसान सूखी फसल मंडियों में ला सकेंगे और खरीद प्रक्रिया बिना अड़चन के पूरी हो सकेगी।
भूजल संकट पर गंभीर चिंता
मान ने ग्रामीणों को बताया कि पंजाब के 153 ब्लॉक में से 117 ब्लॉक ‘ब्लैक डार्क जोन’ में जा चुके हैं। यानी यहां भूजल स्तर बेहद खतरनाक स्थिति में है। इस संकट से निपटने के लिए सरकार जल संरक्षण और सिंचाई के बेहतर विकल्पों पर काम कर रही है।
शादी पर खर्च न करें किसान
मुख्यमंत्री ने किसानों को भव्य और खर्चीली शादियों से बचने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि शादी जैसे आयोजनों को सादगी से मनाया जाए ताकि किसान कर्ज के बोझ में न डूबें। “फिजूलखर्ची की होड़ से बाहर निकलना ही समय की मांग है,” उन्होंने कहा।
किसानों की प्रतिक्रिया
गांव के बुजुर्ग किसानों ने बताया कि पिछले 70 सालों में यह पहली बार हुआ है कि कोई मुख्यमंत्री खुद उनके खेतों में आकर उनकी बात सुन रहा है। किसान इस अनौपचारिक और जमीन से जुड़ी पहल से बेहद खुश नज़र आए।
निष्कर्ष
मुख्यमंत्री भगवंत मान का यह जमीनी संवाद साफ संकेत देता है कि पंजाब सरकार अब नीतियों को सिर्फ कागज़ों तक नहीं, बल्कि गांवों की गलियों और खेतों तक पहुंचाना चाहती है। किसानों के साथ इस तरह की सीधी बातचीत, बदलाव की ओर एक मजबूत कदम मानी जा रही है।

