कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने एक बड़े ऑर्गेनिक कॉटन घोटाले का खुलासा किया है, जिसमें पिछले एक दशक में लगभग ₹2.1 लाख करोड़ का गबन हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि मध्य प्रदेश में नॉन-ऑर्गेनिक कपास (रासायनिक कपास) को ऑर्गेनिक कॉटन (जैविक कपास) के रूप में बेचकर बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी की गई है। इसके लिए किसानों के नाम पर जाली सर्टिफिकेशन बनाए गए और अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारत की छवि को नुकसान पहुंचा है।
कैसे हुआ घोटाला?
-
किसानों के नाम पर फर्जीवाड़ा:
-
इंटरनल कंट्रोल सिस्टम (ICS) के तहत किसानों के समूह बनाए गए, जिन्हें ऑर्गेनिक कपास उगाने वाला बताया गया।
-
हकीकत में, 98% किसानों को इसकी जानकारी तक नहीं थी कि उनके नाम पर सर्टिफिकेशन जारी किए जा रहे हैं।
-
-
जाली सर्टिफिकेशन और टैक्स चोरी:
-
कंपनियों ने झूठे ट्रांजैक्शन सर्टिफिकेट बनवाकर सामान्य कपास को ऑर्गेनिक बताकर बेचा, जिसकी कीमत 2-3 गुना अधिक होती है।
-
सिर्फ दो कंपनियों में ही ₹750 करोड़ की GST चोरी पकड़ी गई, जिससे अनुमान लगाया जा रहा है कि पूरे घोटाले का आकार ₹7,500 करोड़ से अधिक हो सकता है 1214।
-
-
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की बदनामी:
-
GOTS (Global Organic Textile Standard) ने 2020 में 11 कंपनियों पर प्रतिबंध लगाया और एक प्रमुख सर्टिफायर की मान्यता रद्द कर दी।
-
USDA (अमेरिका) और यूरोपीय संघ (EU) ने भी भारतीय ऑर्गेनिक प्रमाणन पर सवाल उठाए और कई सर्टिफायरों को मान्यता नहीं दी 1214।
-
सरकार की प्रतिक्रिया और कार्रवाई
-
केंद्र सरकार ने आरोपों को खारिज किया, लेकिन वाणिज्य मंत्रालय ने स्वीकार किया कि APEDA ने कुछ मामलों में कार्रवाई की है।
-
धार जिले में एक ICS प्रबंधक के खिलाफ FIR दर्ज की गई और एक सर्टिफिकेशन एजेंसी की मान्यता रद्द की गई।
-
दिग्विजय सिंह ने CBI जांच और किसानों को मुआवजा देने की मांग की है।
यह घोटाला न केवल किसानों के शोषण का मामला है, बल्कि भारत की वैश्विक विश्वसनीयता को भी नुकसान पहुंचा है। कांग्रेस ने कोर्ट-मॉनिटर्ड CBI जांच की मांग की है, ताकि दोषियों को सजा मिल सके और किसानों को न्याय मिले।

