कांग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के नेतृत्व में INDIA गठबंधन के 300 से अधिक सांसदों ने आज संसद भवन के मकर द्वार से चुनाव आयोग तक एक विरोध मार्च निकाला। यह मार्च विशेष गहन संशोधन (SIR) प्रक्रिया और राहुल गांधी द्वारा लगाए गए ‘वोट चोरी’ के आरोपों के विरोध में आयोजित किया गया था। हालांकि, दिल्ली पुलिस ने मार्च को रास्ते में ही रोक दिया और कई सांसदों को हिरासत में ले लिया, जिन्हें बाद में छोड़ दिया गया।
मार्च के दौरान हुई घटनाएँ
-
मार्च को दिल्ली पुलिस ने बैरिकेडिंग कर रोक दिया, जिसके बाद समाजवादी पार्टी (एसपी) के अध्यक्ष अखिलेश यादव समेत कई नेताओं ने बैरिकेड्स पर चढ़कर विरोध जताया।
-
पुलिस ने राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, अखिलेश यादव और अन्य सांसदों को हिरासत में लेकर पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने ले जाया, लेकिन कुछ घंटों बाद सभी को रिहा कर दिया गया।
-
कांग्रेस सांसद सैयद नसीर हुसैन ने कहा, “हमें चुनाव आयोग से मिलने नहीं दिया जा रहा है… 300 से ज्यादा सांसद यहां मार्च कर रहे हैं, लेकिन पुलिस हमें रोक रही है।”
विपक्ष का आरोप: ‘लोकतंत्र और संविधान पर खतरा’
राहुल गांधी ने हिरासत से पहले कहा, “यह लड़ाई राजनीतिक नहीं, बल्कि संविधान और ‘एक व्यक्ति, एक वोट’ के सिद्धांत को बचाने की है। हम चुनाव आयोग से पारदर्शी डिजिटल वोटर लिस्ट जारी करने की मांग कर रहे हैं।” उन्होंने कर्नाटक के महादेवपुरा सीट पर 2024 के लोकसभा चुनाव में एक लाख फर्जी मतदाताओं के नाम जोड़े जाने का आरोप लगाया।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, “अगर सरकार चुनाव आयोग तक जाने से रोकती है, तो मुझे नहीं पता कि वह किस बात से डर रही है।” उन्होंने शाम को INDIA ब्लॉक के सांसदों के साथ एक रणनीति बैठक भी की56।
चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा, “जब तक चुनावों की निष्पक्षता पर संदेह बना रहेगा, चुनाव आयोग की विश्वसनीयता को नुकसान होगा।” वहीं, कांग्रेस प्रवक्ता जयराम रमेश ने बताया कि चुनाव आयोग ने उनके पत्र का जवाब नहीं दिया और केवल 30 सांसदों के प्रतिनिधिमंडल को मिलने की अनुमति दी।
भाजपा का पलटवार
इससे पहले, भाजपा ने राहुल गांधी पर चुनाव आयोग पर अविश्वास जताने का आरोप लगाते हुए उनसे लोकसभा सदस्यता से इस्तीफा देने की मांग की थी। भाजपा प्रवक्ता गौरव भाटिया ने कहा था, “अगर आपको चुनाव आयोग और सुप्रीम कोर्ट पर भरोसा नहीं है, तो आपको संसद से इस्तीफा देना चाहिए।”12
निष्कर्ष
यह प्रदर्शन INDIA गठबंधन की चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग को लेकर एक बड़ा कदम है। हालांकि, सरकार और विपक्ष के बीच तनाव बढ़ने के साथ-साथ राजनीतिक माहौल और गरमा गया है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और जोरदार बहस की उम्मीद है।

