कांग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के नेतृत्व में विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ के सांसदों ने आज संसद भवन से चुनाव आयोग (ईसीआई) मुख्यालय तक मार्च निकाला। यह मार्च बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) और 2024 के लोकसभा चुनाव में ‘वोट चोरी’ के आरोपों के खिलाफ आयोजित किया गया।
प्रदर्शन का उद्देश्य
विपक्षी सांसदों का आरोप है कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और चुनाव आयोग के बीच मिलीभगत से मतदाता सूचियों में हेराफेरी की गई, जिससे चुनावी प्रक्रिया प्रभावित हुई। राहुल गांधी ने हाल ही में कर्नाटक के बेंगलुरु सेंट्रल लोकसभा क्षेत्र के महादेवपुरा विधानसभा क्षेत्र में 1 लाख से अधिक फर्जी मतदाताओं का दावा करते हुए ‘वोट चोरी’ का आरोप लगाया था।
मार्च का विवरण
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मार्च सुबह 11:30 बजे संसद भवन के मकर द्वार से शुरू हुआ और निर्वाचन सदन (ईसीआई कार्यालय) तक पहुंचा।
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इसमें कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस, राष्ट्रीय जनता दल (राजद) समेत 25 दलों के 300 से अधिक सांसद शामिल हुए।
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विपक्ष ने चुनाव आयोग से डिजिटल मतदाता सूची जारी करने और पारदर्शिता बढ़ाने की मांग की।
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दिल्ली पुलिस ने बताया कि इस मार्च के लिए कोई आधिकारिक अनुमति नहीं ली गई थी, लेकिन सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए ।
चुनाव आयोग से मुलाकात
चुनाव आयोग ने विपक्षी नेताओं से मिलने के लिए दोपहर 12 बजे का समय दिया था, जिसमें अधिकतम 30 सदस्यों को शामिल होने की अनुमति थी। विपक्ष ने इस मौके पर चुनावी धांधली के सबूत पेश करने और मतदाता सूचियों की जांच की मांग की।
राहुल गांधी का आरोप और ईसीआई का जवाब
राहुल गांधी ने कहा कि “वोट चोरी लोकतंत्र के मूल सिद्धांत ‘एक व्यक्ति, एक वोट’ पर हमला है।” उन्होंने एक वेब पोर्टल (votechori.in) लॉन्च किया, जहां लोग ‘वोट चोरी’ के खिलाफ समर्थन जता सकते हैं।
चुनाव आयोग ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि यदि विपक्ष के पास सबूत हैं तो वे शपथ पत्र दायर करें।
शाम को डिनर मीटिंग
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने शाम को ताज पैलेस होटल में विपक्षी सांसदों के लिए डिनर मीटिंग रखी, जहां आगे की रणनीति पर चर्चा होगी।
निष्कर्ष
यह प्रदर्शन विपक्ष की चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग का हिस्सा है। अब देखना होगा कि चुनाव आयोग इन आरोपों पर क्या कार्रवाई करता है।

