देश में अब दूध उत्पादन को बढ़ावा देने और पशुओं की नस्ल सुधारने के लिए सेक्स सॉर्टेड सीमन टेक्नोलॉजी को बड़े स्तर पर बढ़ावा दिया जा रहा है। यह तकनीक गाय-भैंस से 90 फीसदी तक बछिया (फीमेल) पैदा करने की गारंटी देती है, जिससे दूध देने वाले पशुओं की संख्या में इजाफा होता है। हालांकि, अभी तक इसकी महंगी कीमत किसानों के लिए एक बड़ी बाधा रही है।
अब इस दिशा में बड़ी पहल की है नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड (NDDB) ने। बोर्ड ने कम कीमत में सेक्स सॉर्टेड सीमन उपलब्ध कराने के लिए देश में ही विशेष मशीनें लगवाने की तैयारी कर ली है, ताकि विदेशी मशीनों पर निर्भरता कम हो और एक डोज की कीमत 300 से 500 रुपये तक लाई जा सके।
सीआईआरबी, हिसार के रिटायर्ड प्रिंसिपल साइंटिस्ट डॉ. सज्जन सिंह ने बताया कि सेक्स सॉर्टेड सीमन तकनीक से बछिया ही पैदा होती हैं, जिससे किसान को लंबे समय में दुग्ध उत्पादन के जरिए बड़ा फायदा मिलता है।
NDDB का बड़ा प्लान:
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अमेरिका की दो कंपनियां फिलहाल इस तकनीक की मशीनें बना रही हैं, जो बेहद महंगी हैं।
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NDDB अब देश के चार सीमन स्टेशनों पर ये मशीनें लगाकर सस्ते दामों पर स्ट्रॉ बनवाएगा।
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स्ट्रॉ तैयार होते ही कीमत 300 से 500 रुपये के बीच लाई जाएगी, जो फिलहाल बाजार में काफी महंगी है।
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सरकार इसके लिए 50% सब्सिडी भी देती है। गर्भधारण सुनिश्चित होने पर पशुपालक को 750 रुपये तक की प्रोत्साहन राशि भी दी जाती है।
अब तक की सफलता:
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वर्ष 2019-20 से 2023-24 के बीच 89 लाख डोज तैयार की जा चुकी हैं।
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अब तक इससे करीब 72 लाख बछिया पैदा हो चुकी हैं।
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इस तकनीक को 90% तक सफल माना गया है।
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यह पूरी मुहिम राष्ट्रीय गोकुल मिशन के तहत चलाई जा रही है।
कुछ चुनौतियां भी:
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महंगी तकनीक के कारण किसानों तक सीमित पहुंच।
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पशुओं की ‘हीट’ यानी सही प्रजनन समय का पता न चलने पर डोज बेअसर हो सकती है।
निष्कर्ष:
NDDB की इस पहल से देश के लाखों पशुपालकों को सीधा फायदा मिलेगा। बछिया की संख्या बढ़ने से दुग्ध उत्पादन में क्रांतिकारी बदलाव आने की संभावना है। साथ ही नस्ल सुधार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।

