֍:भारत में ये चार मंडियां हैं सबसे बड़ी§ֆ:बकरीद क दौरान उत्तर भारत में बकरों की चार बड़ी मंडियां लगती हैं. इन्हीं मंडियों से निकला बकरा देश के दूसरे इलाकों में बिकने के लिए जाता है. बकरों की ये बड़ी मंडी- जसवंत नगर (यूपी), कालपी (मध्य प्रदेश), महुआ, अलवर (राजस्थान) और मेवात (हरियाणा) मंडी हैं. जानकारों की मानें तो इन सभी चार मंडियों में खास छह नस्ल के बकरों की खूब खरीद-फरोख्त होती है. इन मंडियों से ही बकरे महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल तक भी जाते हैं.§ֆ:इसमें देश की बकरे-बकरियों की करीब 40 से अधिक नस्ल आती हैं. इसमें से कुछ दूध के लिए पाली जाती हैं तो कुछ दूध और मीट के लिए पाले जाते हैं. यूपी में खास नस्ल बरबरी, जमनापारी है. बरबरी नस्ल के बकरे को बरबरा कहा जाता है. इसकी देश के अलावा अरब देशों में भी अच्छी डिमांड है. जखराना, सिरोही, सोजत राजस्थान के तो तोतापरी नस्ल का बकरा हरियाणा का है.§ईद के मौके पर मुस्लिम धर्म में बकरों की कुर्बानी दी जाती है. जानकारों के अनुसार ईद के फैरन बाद ही बकरीद के लिए बकरों की खकरीदी शुरु हो जाती है. कुर्बानी करने वाले मुसलमान अपनी सहुलियत के हिसाब से बकरे खरीदते हैं. कोई दो महीने पहले ही बकरे खरीद लेता है तो कोई 10-15 दिन पहले. हालांकि कुछ लोग बचपन से भी बकरे को पालते हैं. लेकिन बकरा मंडियों में दो महीने पहले से ही बकरे की डिमांड बढ़ जाती है. बकरे के साथ-साथ भेड़ की कुर्बानी भी इसी दिन दी जाती है. इस दौरान मंडियों में 12 हजार से लेकर लाखों तक के बकरे आते हैं.

