ओडिशा सरकार ने राज्य के रबी धान उत्पादक किसानों को बड़ी राहत देते हुए घोषणा की है कि तय समय सीमा (30 जून) के बाद भी जिन किसानों के पास वैध टोकन हैं, उनके धान की खरीद की जाएगी। यह निर्णय राज्य के कई हिस्सों में मंडियों में धान की खरीद में देरी और किसानों के विरोध के बीच लिया गया है।
राज्य के खाद्य आपूर्ति और उपभोक्ता कल्याण मंत्री कृष्ण चंद्र पात्रा ने इस निर्णय की घोषणा करते हुए कहा कि जिन किसानों के पास टोकन हैं, वे सोमवार को संबंधित मंडियों में जाकर अपनी आईरिस स्कैनिंग करवा लें, ताकि उनके जैविक सत्यापन की प्रक्रिया पूरी हो सके और भविष्य में उन्हें धान बेचने का अवसर मिल सके।
टोकन की वैधता पर भी नहीं लगेगा कोई असर
मंत्री पात्रा ने कहा, “कोई भी टोकन अब लैप्स नहीं होगा जब तक सभी किसानों का धान खरीदा नहीं जाता।” उन्होंने स्पष्ट किया कि भले ही टोकन की समयसीमा समाप्त हो गई हो, सरकार हर पंजीकृत किसान का धान न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीदेगी। उन्होंने बताया कि किसानों को एक बार बायोमेट्रिक सत्यापन कराना होगा, जिसके बाद सरकार उन्हें उपयुक्त तारीख पर बिक्री का अवसर देगी।
मंडियों में बारिश से भरा धान और जगह की कमी
मंत्री ने यह भी बताया कि इस बार मंडियों में जगह की कमी और बारिश के कारण स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो गई है। धान उठाव में देरी का कारण भी यही बताया गया है, जिससे कई किसानों का धान खुले में पड़ा रह गया।
“हमने इस वर्ष रबी सीजन में अब तक 19 लाख टन धान की खरीद की है, जो पिछले साल की तुलना में 7 लाख टन अधिक है। यह दर्शाता है कि राज्य में उत्पादन बढ़ा है और धान खरीद में पारदर्शिता बनी हुई है,” पात्रा ने कहा।
विरोध और मांगें
हालांकि सरकार की ओर से आश्वासन मिलने के बावजूद बालासोर जिले में किसानों ने एनएच-16 पर प्रदर्शन करते हुए धान की तत्काल खरीद की मांग की। वहीं बरगढ़ जिले से खबर है कि मंडियों के पास खुले में रखा धान बारिश के कारण अंकुरित होने लगा है, जिससे किसानों को नुकसान हो रहा है। प्रभावित किसानों ने सरकार से MSP के अनुसार मुआवजा देने की मांग की है, क्योंकि उनके पास वैध टोकन मौजूद हैं।
ओडिशा सरकार का यह निर्णय किसानों के हित में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। हालांकि, स्थानीय स्तर पर खरीदी में पारदर्शिता और समय पर उठाव सुनिश्चित करना अब भी एक बड़ी चुनौती है। सरकार ने यह वादा किया है कि कोई भी किसान अपने धान की बिक्री से वंचित नहीं रहेगा, लेकिन जमीनी स्तर पर त्वरित कार्रवाई ही इस नीति की सफलता को तय करेगी।

