भाकृअनुप–राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केन्द्र (एनआरसीसी), बीकानेर ने जनजातीय उप योजना (टीएसपी) के तहत राजस्थान के प्रतापगढ़ जिले में कृषक-वैज्ञानिक संवाद एवं पशु स्वास्थ्य जागरूकता शिविर आयोजित किए। ये शिविर 4 अगस्त को ग्राम सोबनिया (तहसील पीपलखूंट) और 5 अगस्त को ग्राम मोटा मायंगा (तहसील सुहागपुरा) में आयोजित हुए।
कार्यक्रम के दौरान एनआरसीसी के निदेशक डॉ. अनिल कुमार पूनिया ने बताया कि केन्द्र, टीएसपी के अंतर्गत लक्षित क्षेत्रों के पशुपालकों को वैज्ञानिक पशुधन सेवाएं और तकनीकी सहयोग लगातार प्रदान कर रहा है। उन्होंने उष्ट्र पालन सहित विविध पशुपालन गतिविधियों को आजीविका का मजबूत माध्यम बताते हुए वैज्ञानिक तरीकों के अपनाने का आग्रह किया और केन्द्र की निरंतर सहभागिता का भरोसा दिलाया।
वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. रतन चौधरी ने उष्ट्र पालन की वैज्ञानिक विधियों पर जानकारी दी। उन्होंने स्वच्छ दुग्ध उत्पादन और समन्वित कृषि मॉडल की महत्ता पर विशेष जोर दिया, जिससे पशुपालकों की आमदनी और पशु स्वास्थ्य दोनों में सुधार हो सकता है।
ग्राम सोबनिया की सरपंच दलु और ग्राम मोटा मायंगा के सरपंच श्री शांतिलाल ने इन शिविरों की सराहना करते हुए कहा कि यह पहल जनजातीय क्षेत्रों के पशुपालकों के लिए अत्यंत लाभकारी है।
कार्यक्रम के दौरान 1240 पशुओं (ऊंट, गाय, बैल, भैंस, बकरी, भेड़ और मुर्गी) को रोगों से बचाव के लिए दवाइयां और किट वितरित की गईं। साथ ही पशुपालकों को पशु स्वास्थ्य, रोग प्रबंधन, वैज्ञानिक आधारित पशुपालन पद्धतियां और पोषण संबंधी आवश्यक जानकारी भी प्रदान की गई।
इन शिविरों का आयोजन इंडियन फार्म फॉरेस्ट्री डेवलपमेंट को-ऑपरेटिव लिमिटेड, प्रतापगढ़ के सहयोग से किया गया, जिसमें 215 से अधिक परिवारों ने भाग लिया।

