राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने नेशनल हाईवे परियोजनाओं की गुणवत्ता और निगरानी प्रणाली को बेहतर बनाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। अब से किसी भी परामर्शदाता फर्म (Consultancy Firm) के एक ‘इंजीनियर’ को अधिकतम 10 परियोजनाओं की ही निगरानी का कार्य सौंपा जा सकेगा।NHAI ने यह निर्णय इस आधार पर लिया है कि कई परामर्शदाता कंपनियां स्वतंत्र इंजीनियर (Independent Engineer), प्राधिकरण इंजीनियर (Authority Engineer) या पर्यवेक्षण सलाहकार (Supervision Consultant) के रूप में कार्य करते हुए एक ही इंजीनियर को कई परियोजनाओं की निगरानी का जिम्मा दे देती हैं। इससे उस इंजीनियर के लिए सभी परियोजनाओं में गुणवत्ता नियंत्रण और अनुबंधीय शर्तों का पालन सुनिश्चित कर पाना मुश्किल हो जाता है।
हर माह साइट विज़िट और रिपोर्ट अनिवार्य
नई गाइडलाइंस के तहत, परामर्शदाता फर्म से जुड़े ‘नामित इंजीनियर’ को अब हर महीने अपनी जिम्मेदारी वाले हर प्रोजेक्ट साइट का दौरा करना होगा और प्रगति रिपोर्ट (Monthly Progress Report) तैयार करनी होगी। यह रिपोर्ट परामर्श अनुबंध और सिविल अनुबंध के अनुसार तैयार की जाएगी।
HAM और EPC मोड पर भी होंगे सख्त नियम
यह नियम हाइब्रिड एन्यूटी मोड (HAM) और इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट एवं कंस्ट्रक्शन (EPC) मोड पर क्रियान्वित की जा रही परियोजनाओं पर भी लागू होगा। नई गाइडलाइंस में स्वतंत्र इंजीनियरों की नियुक्ति और उनकी जिम्मेदारियों के निर्धारण से जुड़ी विस्तृत शर्तें शामिल की गई हैं।
60 दिन में लागू होंगे नए दिशा-निर्देश
NHAI ने परामर्शदाता फर्मों को 60 दिनों की मोहलत दी है ताकि वे इस नए प्रावधान के अनुरूप आवश्यक व्यवस्थाएं कर सकें। इसके बाद यह नियम लागू कर दिया जाएगा।
गुणवत्ता और सुरक्षा में होगा सुधार
इस निर्णय का उद्देश्य परियोजनाओं की निगरानी की गुणवत्ता में सुधार करना, संचालन क्षमता बढ़ाना और राष्ट्रीय राजमार्गों का सुचारू तथा सुरक्षित संचालन सुनिश्चित करना है। यह पहल देशभर में यात्रियों को बेहतर और निर्बाध यात्रा अनुभव प्रदान करने में सहायक सिद्ध होगी।

