देश में बागवानी क्षेत्र के समग्र विकास के उद्देश्य से संचालित राष्ट्रीय बागवानी मिशन (National Horticulture Mission) ने बीते वर्षों में उल्लेखनीय प्रगति की है। यह मिशन, एकीकृत बागवानी विकास मिशन (MIDH) की एक उप-योजना है, जिसे वर्ष 2014 से कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा लागू किया जा रहा है।
बागवानी क्षेत्र में हुआ क्षेत्र विस्तार
मिशन की शुरुआत से अब तक, यानी वर्ष 2014-15 से जुलाई 2025 तक, 15.66 लाख हेक्टेयर अतिरिक्त क्षेत्र में बागवानी फसलों की खेती को बढ़ावा दिया गया है। इस योजना के तहत सभी प्रकार की बागवानी फसलें, चाहे वे किसी भी किस्म की हों, शामिल की गई हैं। इससे देश में फलों, सब्जियों, फूलों, मसालों और औषधीय पौधों के उत्पादन को व्यापक प्रोत्साहन मिला है।
उत्पादकता में हुआ सुधार
गुणवत्तापूर्ण रोपण सामग्री और माइक्रो इरिगेशन जैसी तकनीकों के इस्तेमाल से बागवानी फसलों की उत्पादकता में भी सुधार देखा गया है। वर्ष 2019-20 में जहां उत्पादकता 12.10 मीट्रिक टन प्रति हेक्टेयर थी, वहीं 2024-25 (द्वितीय अग्रिम अनुमान) के अनुसार यह बढ़कर 12.56 मीट्रिक टन प्रति हेक्टेयर हो गई है।
मजबूत हुआ भंडारण और विपणन ढांचा
पिछले पांच वर्षों के दौरान पोस्ट हार्वेस्ट मैनेजमेंट (PHM) के तहत 55,748 अवसंरचनाएं स्थापित की गई हैं, जिनमें शामिल हैं:
- कोल्ड स्टोरेज / नियंत्रित वातावरण भंडारण
- पैक हाउस
- पकने वाले चेंबर
- रीफर वाहन
- मोबाइल/प्राथमिक प्रोसेसिंग यूनिट
- संरक्षण इकाइयाँ और खाद्य प्रसंस्करण सुविधाएं
इसके अलावा, 11,140 विपणन अवसंरचनाएं भी स्थापित की गई हैं, जिनमें:
- स्थायी / मोबाइल वेंडिंग कार्ट
- रिटेल आउटलेट्स
- ग्रामीण और प्राथमिक बाजार
- अपनी मंडी / डायरेक्ट मार्केट
- थोक और टर्मिनल बाजार शामिल हैं।
राज्य सरकारों की प्रमुख भूमिका
MIDH योजना को राज्य सरकारों के माध्यम से लागू किया जा रहा है। इसी कारण, योजना के तहत मिलने वाले लाभ, रोजगार सृजन और अन्य आंकड़े राज्यों द्वारा संकलित किए जाते हैं।
समग्र कृषि विकास की दिशा में सार्थक पहल
राष्ट्रीय बागवानी मिशन न केवल किसानों को अधिक आय के अवसर उपलब्ध करा रहा है, बल्कि कृषि को उन्नत तकनीक, भंडारण सुविधा और बाजार से जोड़कर कृषि क्षेत्र को एक नया आयाम भी दे रहा है। इससे न केवल खाद्य सुरक्षा सुदृढ़ हो रही है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था में भी मजबूती आ रही है।

