नेशनल एग्रीकल्चरल को-ऑपरेटिव मार्केटिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (NAFED) ने ‘अंतरराष्ट्रीय सहकारिता वर्ष 2025’ को ऐतिहासिक और प्रभावशाली बनाने की दिशा में तैयारियां शुरू कर दी हैं। नेफेड का उद्देश्य इस वर्ष को न केवल भारत में सहकारी आंदोलन को मजबूती देने के लिए प्रयोग करना है, बल्कि वैश्विक स्तर पर भारत की सहकारिता शक्ति को प्रस्तुत करना भी है।
सहकारिता के क्षेत्र में भारत का बढ़ता दबदबा
संयुक्त राष्ट्र द्वारा 2025 को ‘अंतरराष्ट्रीय सहकारिता वर्ष’ घोषित किए जाने के बाद, भारत सरकार और सहकारी संस्थाएं इस अवसर को सहकारिता क्षेत्र को नया आयाम देने के रूप में देख रही हैं। नेफेड इस दिशा में कई कार्यक्रमों, अंतरराष्ट्रीय सेमिनारों, एक्सपो और जागरूकता अभियानों की रूपरेखा तैयार कर रहा है।
नेफेड ने बनाई महत्तवपूर्ण योजना
नेफेड ने आगामी वर्ष के लिए एक व्यापक योजना बनाई है जिसमें शामिल हैं:
-
राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सेमिनारों का आयोजन
-
कृषि एवं सहकारी उत्पादों की अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी
-
सहकारिता जागरूकता कार्यक्रम
-
सफल सहकारी मॉडलों को वैश्विक मंच पर लाना
नेफेड के चेयरमैन ने हाल ही में बयान देते हुए कहा,“भारत में सहकारिता केवल एक आर्थिक मॉडल नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय और समावेश का प्रतीक है। अंतरराष्ट्रीय सहकारिता वर्ष 2025 हमें वैश्विक स्तर पर भारत की सहकारी शक्ति दिखाने का सुनहरा मौका देगा।”
सरकार का भी पूरा समर्थन
गृह मंत्री और सहकारिता मंत्री अमित शाह पहले ही इस बात पर ज़ोर दे चुके हैं कि सहकारी संस्थाएं देश के विकास में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। ‘अंतरराष्ट्रीय सहकारिता वर्ष 2025’ को लेकर केंद्र सरकार और संबंधित मंत्रालयों के बीच समन्वय स्थापित किया जा रहा है ताकि एक मजबूत रोडमैप तैयार किया जा सके।

