ֆ:क्षेत्र में सरसों की कटाई मार्च के मध्य से शुरू हो जाती है और किसान अपनी उपज मंडी में लाने लगते हैं। हालांकि, मार्च और अप्रैल में बाजार में सरसों की कीमतें 5500 से 5800 रुपये प्रति क्विंटल के आसपास बनी रहीं, जिससे किसानों में मायूसी थी। लेकिन मई में मांग में अचानक वृद्धि होने से सरसों के दामों में 200 से 300 रुपये प्रति क्विंटल तक का इजाफा देखा गया।
§ֆ:मंडी व्यापारियों का कहना है कि यह तेजी बाजार में बनी मजबूत मांग और अंतरराष्ट्रीय हालातों के चलते आई है। खासतौर पर भारत द्वारा पाकिस्तान पर की गई स्ट्राइक के बाद सरसों के दामों में लगभग 200 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जिससे बाजार में सकारात्मक माहौल बन गया।
§ֆ:सरसों के बढ़ते भावों के बीच किसान अब अपने घरों में संग्रहित उपज को मंडी में बेचने के लिए ला रहे हैं। मंडी में अब रोजाना एक हजार कट्टों से अधिक सरसों की आवक हो रही है। व्यापारी नरेश अग्रवाल, मनीष अग्रवाल और रमेश सैनी का कहना है कि यह उछाल किसानों के लिए उम्मीद की किरण है और उन्हें अपनी मेहनत का वाजिब दाम मिलने लगा है।
§ֆ:इस बीच, बहरोड़ की क्रय विक्रय सहकारी समिति द्वारा राजफैड के माध्यम से न्यूनतम समर्थन मूल्य पर सरसों की खरीद के लिए कांटा लगाया गया था, लेकिन मंडी में बढ़ते भावों को देखते हुए अब किसान समर्थन मूल्य पर उपज बेचने की बजाय खुली मंडी में बेहतर दाम हासिल करने को प्राथमिकता दे रहे हैं।
§ֆ:कुल मिलाकर, सरसों के भावों में आई यह तेजी बहरोड़ क्षेत्र के किसानों के लिए आर्थिक राहत लेकर आई है और अगर यह रुझान बरकरार रहता है, तो आने वाले समय में किसानों की आय में और सुधार देखने को मिल सकता है।
§बहरोड़ कृषि उपज मंडी से किसानों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। रबी सीजन की मुख्य फसल सरसों के भावों में दो महीने की सुस्ती के बाद आखिरकार जबरदस्त उछाल आया है। अब मंडी में सरसों 6000 से 6250 रुपये प्रति क्विंटल के भाव पर बिक रही है, जिससे किसानों में खुशी की लहर दौड़ गई है।

