֍:सरकार ने की मांग§ֆ:इस साल किसान महापंचायत ने राज्य क सहकारिता मंत्री को पत्र लिखकर हर किसान से रोजाना 40 क्विंटल सरकार खरीद करने की मांग की है. लेकिन, सरकार एक किसान से दिन में सिर्फ 25 ही खरीदती है, जिससे किसानों को परेशान होना पड़ता है. किसान महापंचायक ने सभी गांवों में सहकारी समितियों को खरीद केंद्र बनाने की भी मांग की है, जिससे किसानों को फसल बेचने के लिए दूर न जाना पड़े. राजस्थान देश का सबसे बड़ा सरसों उत्पादक है. राज्य में देश का 48 फीसदी सरसों उगाया जाता है. केंद्र सरकार ने राज्य के कुल उत्पादन का कम से कम 25 फीसदी तिलहन एमएसपी पर खरीदने का नियम बनाया है. लेकिन पिछले सीजन में राजस्थान में मुश्किंल से 10 फीसदी ही सरसों खरीदा. जिस कारण किसानों को कम दामों में व्यापारियों को सरसों बेचना पड़ा था.§एमएसपी गारंटी कानून बनाने की मांग को लकर राजस्थान के किसानों ने ‘गांव बंद’ के बाद एक और बड़ा फैसला लिया है. इसके तहत 1-15 मार्च तक सरसों नहीं बेचने का निर्णय लिया गया है. किसी व्यापारी को अगर सरसों खरीदनी है तो उसे 6000 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से बोली लगाकर खरीदी करनी होगी. आंदोलन की अगुवाई किसान पंचायत करेगा. इसके लिए सूबे के सरसों उत्पादक 21 जिलों में अभियान चलाया गया है. इस सरसों सत्याग्रह का मकसद किसानों को व्यापारियों के शोषण से बचाना है. पिछले साल राजस्थान के किसान सरकारी बदइंतजामी की वजह से कम दाम पर सरसों बेचने पर मजबूर हुए थे.

