कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय (MSDE) तथा कृषि अनुसंधान और शिक्षा विभाग (DARE) द्वारा संयुक्त रूप से नई दिल्ली स्थित कौशल भवन में “Skilling: Future Ready Workforce” विषयक कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया। यह कार्यशाला 5वीं राष्ट्रीय मुख्य सचिव सम्मेलन की पूर्व-संविधानात्मक कड़ी के रूप में आयोजित की गई थी और इसका प्रमुख उद्देश्य भारत के लिए एक मजबूत, लचीला और भविष्य के लिए तैयार मानव संसाधन रणनीति का निर्माण करना था।
मानव पूंजी विकास पर राष्ट्रीय संकल्प
कार्यशाला का आयोजन “विकसित भारत के लिए मानव पूंजी” विषय के अंतर्गत किया गया। इसमें नीति निर्माताओं, विषय विशेषज्ञों, उद्योग जगत के प्रतिनिधियों और शिक्षाविदों ने भाग लिया और एकीकृत दृष्टिकोण से भविष्य के लिए तैयार कार्यबल को विकसित करने की दिशा में विचार-विमर्श किया।
पांच प्रमुख फोकस क्षेत्र
कार्यक्रम की शुरुआत में एमएसडीई की अपर सचिव सोनल मिश्रा ने स्किलिंग को जनसंख्या रुझानों, तकनीकी परिवर्तनों और उभरती उद्योग आवश्यकताओं के अनुरूप ढालने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने ‘विकसित भारत’ के लिए मानव पूंजी विकास के पांच प्रमुख क्षेत्रों की रूपरेखा प्रस्तुत की —
- सबके लिए स्किलिंग
- कौशल और रोजगार के बीच की खाई को पाटना
- उद्योग की मांग के अनुसार कौशल विकास
- सेवा वितरण प्रणाली को मजबूत करना
- पुनः कौशल और उन्नयन प्रशिक्षण
“कौशल विकास ही विकसित भारत की आधारशिला है” – राजित पुनहानी
एमएसडीई के सचिव राजित पुनहानी ने कहा, “विकसित भारत @2047 के लिए कौशल प्रशिक्षण सबसे महत्वपूर्ण आधार है। हमें सुनिश्चित करना चाहिए कि हर युवा और पेशेवर को सही कौशल मिले ताकि वे संगठनात्मक विकास और राष्ट्र निर्माण दोनों में सार्थक योगदान दे सकें।” उन्होंने कृषि स्किलिंग, आईटीआई उन्नयन और भविष्य की तकनीकों को तीन मुख्य स्तंभ बताया।
उन्होंने कृषि को मुख्यधारा में लाकर ग्रामीण युवाओं को सशक्त बनाने, आईटीआई को उद्योग अनुरूप संस्थानों में बदलने और भविष्य की तकनीकों (जैसे AI, Robotics, IoT) पर ध्यान देने की आवश्यकता को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि “स्किलिंग को प्रेरणादायक और आकांक्षात्मक बनाना समय की मांग है।”
कृषि को स्किलिंग का केंद्र बनाने की आवश्यकता – डॉ. राजबीर सिंह
DARE के उप-महानिदेशक राजबीर सिंह ने कृषि को भारत की अर्थव्यवस्था का मूल बताया और कहा कि कृषि व सम्बद्ध क्षेत्रों में कौशल विकास को राष्ट्रीय प्राथमिकता बनाया जाना चाहिए। उन्होंने कृषि विज्ञान केंद्रों (KVKs) को प्रशिक्षण एवं उद्यमिता समर्थन केंद्रों में बदलने का सुझाव दिया।
₹60,000 करोड़ की ITI उन्नयन योजना पर प्रस्तुति
कार्यशाला में डायरेक्टरेट जनरल ऑफ ट्रेनिंग (DGT) द्वारा हाल ही में स्वीकृत ₹60,000 करोड़ की आईटीआई उन्नयन योजना पर विस्तृत प्रस्तुति दी गई। इसमें राज्यों में आधुनिक, उद्योग केंद्रित कौशल हब्स के निर्माण की रणनीति साझा की गई। कई राज्यों ने इस योजना के तहत किए गए प्रयास जैसे – निजी क्षेत्र की साझेदारी, क्षेत्रीय कौशल क्लस्टर्स की पहचान, और बुनियादी ढांचे के आधुनिकीकरण की दिशा में उठाए गए कदमों को साझा किया। हालांकि, छोटे राज्यों में निजी भागीदारी की कमी, प्रशिक्षकों की कमी जैसी चुनौतियों पर भी चर्चा हुई।
राज्यों की भागीदारी और नवाचार की प्रस्तुतियां
कार्यशाला में कर्नाटक और ओडिशा ने “सबके लिए स्किलिंग” पर आधारित समावेशी पहलों को साझा किया, जबकि असम ने कौशल और रोजगार के बीच अंतर को पाटने के अपने प्रयास प्रस्तुत किए। उत्तर प्रदेश और त्रिपुरा ने उद्योग आधारित स्किलिंग पर बल दिया और पश्चिम बंगाल ने सेवा वितरण तंत्र को मजबूत करने की रणनीति साझा की। इन प्रस्तुतियों ने राज्यों की विविधता और साझा प्रतिबद्धता को उजागर किया।
उद्योग और सार्वजनिक क्षेत्र की सक्रिय भागीदारी
कार्यशाला में उद्योग जगत से Adobe, Sodexo, Avaada Group, Lemon Tree Hotels, UPS, Escorts, Tata Strive जैसी कंपनियों ने भाग लिया। इन प्रतिनिधियों ने पुनः कौशल, उन्नयन, और सेवा वितरण जैसे विषयों पर अपने अनुभव साझा किए। साथ ही, Indian Oil और Bharat Petroleum जैसे सार्वजनिक उपक्रमों ने अपने प्रशिक्षण एवं अनुसंधान कार्यक्रमों की जानकारी दी।
साझा विजन और भविष्य की दिशा
कार्यशाला में NCVET के पूर्व अध्यक्ष निर्मलजीत सिंह कालसी, DGT की महानिदेशक त्रिशलजीत सेठी, AICTE के सलाहकार डॉ. मोरे रामुलु, पद्मश्री सम्मानित सुल्तान सिंह और विभिन्न राज्यों के अधिकारी मौजूद रहे।
कार्यशाला का समापन एक साझा सहमति के साथ हुआ जिसमें सभी ने मजबूत समन्वय, भविष्य उन्मुख बुनियादी ढांचे में निवेश और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के माध्यम से एक समावेशी स्किलिंग इकोसिस्टम के निर्माण की आवश्यकता पर बल दिया।
यह कार्यशाला न केवल आने वाले मुख्य सचिव सम्मेलन की दिशा तय करेगी, बल्कि भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने की यात्रा में मानव संसाधन विकास के क्षेत्र में मील का पत्थर साबित होगी।

