֍:करनाल में हुईं सबसे अधिक घटनाएं§ֆ:इस साल इन 127 मामलों में से 107 मामले सात जिलों में हुए हैं. करनाल में सबसे अधिक 37 आग लगने की घटनाएं हुईं. इसके बाद कुरुक्षेत्र में 27, कैथल में 9, अंबाला में 9, फरीदाबाद में 9, सोनीपत में 8 और यमुनानगर में 8 मामले सामने आए हैं.§֍:किसानों को सरकार देगी सब्सिडी§ֆ:राज्य सरकारें पराली जलाने की घटनाओं को खत्म करने के लिए किसानों को सब्सिडी दे रही हैं. लेकिन इसके बावजूद भी कुछ और उपाय किए जाने की जरूरत है. हरियाणा में किसानों को अपनी जमीन की जुताई में मदद करने के लिए करीब 90 हजार मशीनें हैं. जिसे किसान इस्तेमाल कर सकते हैं. ICAR की ओर से बताया गया कि सरकारों को भी यह सुनिश्चित करना चाहिए कि यह तकनीक सीमांत किसानों तक भी पहुंच सके. चौधरी के अनुसार, राज्य सरकार को एजेंसियों के लिए फसल अवशेष खरीदने के लिए बाजार भी बनाना चाहिए, ताकि किसानों को इसे जलाने से रोका जा सके.§֍:इसलिए जलाई जाती है पराली§ֆ:अधिकारी ने किसानों की पराली जलाने की वजह पर कहा कि किसान आमतौर पर अपने खेतों को साफ करने और उन्हें अगली फसल के लिए तैयार करने के लिए फसल अवशेष जलाते हैं. लेकिन इससे पर्यावरण प्रदूषण का स्तर बढ़ जाता है और कई स्वास्थ्य संबंधी खतरे पैदा होते हैं. अधिकारी ने कहा कि फसल अवशेष जलाने का मुख्य कारण चावल की कटाई और अगली फसल की बुवाई के बीच का समय कम होना है. हमने पूरे राज्य में मशीनें तैनात की हैं. उनके अधिक से अधिक उपयोग की भी योजना बनाई गई है. §भारत में पराली जलाने की वजह से मौसम काफी खराब हो रहा है. इसको लेकर सरकार भी कई योजनाएं चला रही है. इसी के चलते हरियाणा में पराली जलाने के कई मामले सामने आए हैं. रिपोर्ट के मुताबिक 15 सितंबर से 6 अक्टबर में पराली जलाने के कुल 127 मामले दर्ज किए गए हैं. इनमें से 84 फीसदी घटनाएं सिर्फ 7 जिलों में सामने आई हैं. भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI) की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, पिछले साल इसी अवधि के दौरान हरियाणा में पराली जलाने के 190 मामले सामने आए थे. लेकिन साल 2022 और 2021 में पराली जलाने की घटनाएं क्रमशः 48 और 24 दर्ज की गई थीं.

