बिहार में इस साल मॉनसून की रुक-रुक कर हो रही बारिश और गंगा समेत कई नदियों के बढ़े जलस्तर ने सब्जी की खेती को बुरी तरह प्रभावित किया है। पटना के अंटा घाट सब्जी मंडी में फल बेच रहे अरुण कुमार राय बताते हैं कि गंगा नदी के किनारे उनकी सब्जी की फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई, जिसके बाद उन्हें फल बेचने को मजबूर होना पड़ा 2। इसी तरह, सोन नदी के किनारे खेती करने वाले किसानों की फसलें भी डूब गईं, जबकि ऊंचे इलाकों में खेती करने वाले किसानों को फायदा हुआ 2।
सब्जियों के दामों में भारी उछाल
बाढ़ और फसलों के नुकसान का सीधा असर बाजार में दिख रहा है। पटना की सब्जी मंडियों में टमाटर 70-80 रुपए प्रति किलो, भिंडी, नेनुआ और करेला 50-60 रुपए किलो तक पहुंच गए हैं 2। दुकानदारों का कहना है कि स्थानीय सब्जियों की आपूर्ति कम होने के कारण बाहर से सब्जियां मंगवानी पड़ रही हैं, जिससे कीमतें बढ़ रही हैं।
किसानों पर मंडराता संकट
बाढ़ और जलजमाव से प्रभावित किसानों को भारी नुकसान हुआ है। आरा जिले में धान की रोपाई में देरी हुई, जबकि सब्जी की फसलें सड़ने लगीं 110। कई किसानों ने बताया कि उनकी सब्जियों की फसल पानी में डूबने से बर्बाद हो गई, जिससे उन्हें आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है ।
सरकारी योजनाओं की कमी
किसानों का आरोप है कि सिंचाई नहरों की मरम्मत नहीं होने से उनकी समस्याएं और बढ़ गई हैं। भोजपुर जिले के पसौर गांव के किसानों ने सिंचाई संकट के खिलाफ आत्मदाह की धमकी तक दे दी है 8। हालांकि, बिहार सरकार की “सब्जी विकास योजना 2025” किसानों को तकनीकी और वित्तीय सहायता देने का दावा करती है, लेकिन जमीनी स्तर पर इसका लाभ नहीं दिख रहा ।
आगे क्या होगा?
मौसम विभाग के अनुसार, अगस्त में भी भारी बारिश की संभावना है, जिससे स्थिति और बिगड़ सकती है 5। कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को जल निकासी का उचित प्रबंध करने और फंगसाइड का छिड़काव करने की सलाह दी है।
बिहार में इस साल मॉनसून की अनिश्चितता और नदियों का बढ़ता जलस्तर किसानों और आम जनता दोनों के लिए मुश्किलें खड़ी कर रहा है। जहां किसान फसलों के नुकसान से जूझ रहे हैं, वहीं बाजार में सब्जियों के बढ़ते दामों ने घरों के बजट को भी प्रभावित किया है। सरकार और प्रशासन को इस संकट से निपटने के लिए तत्काल कदम उठाने की जरूरत है।

