फर्टिलाइजर एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एफएआई) भारत के उर्वरक क्षेत्र की प्रमुख संस्था है, जो सरकार, उर्वरक उद्योग और किसानों के बीच सेतु का कार्य करती है। यह संस्था उर्वरक नीतियों, अनुसंधान और किसान शिक्षा में अग्रणी भूमिका निभाती है। इसी क्रम में फसल क्रांति की पत्रकार फिज़ा काज़मी ने एफएआई के महानिदेशक डॉ. सुरेश कुमार चौधरी से बात की, उनसे बातचीत के प्रमुख अंश दिए गए हैं।
- आपने एफएआई के महानिदेशक का कार्यभार संभाला है, आगे के लिए आपकी क्या रणनीति हैं ?
फर्टिलाइजर एसोसिएशन ऑफ इंडिया जिसकों एफएआई भी कहा जाता है, भारत की एक महत्वपूर्ण संस्था है। जो उर्वरक बनाने वाली कंपनियां और सरकार के बीच सामंजस्य बनाने का महत्वपूर्ण कार्य करती है। इसके साथ ही उर्वरकों के आयात और वितरण में भी यह अहम भूमिका निभाती है। उर्वरकों के क्षेत्र में कैपेसिटी बिल्डिंग का काम मैन्युफैक्चर का ही नहीं बल्कि जितने स्टेक हॉलडर्स हैं सबके लिए महत्वपूर्ण भूमिका अदा करती है। इन तीनों क्षेत्रों में नई तकनीकों के आधार पर एफएआई द्वारा काम किए जा रहें हैं। कृषि में नई टूल और तकनीक के आधार पर एफएआई की ओर से रणनीति बन रही है। इसके आधार पर इस संस्था की ओर से नई पहल की जा रही है। इसी कड़ी में नए डेवलपमेंट के साथ हम आगे कदम से कदम मिलाते चलेंगे।
- एफएआई क्या है, और क्या ये किसानों के लिए भी काम कर रही है?
फर्टिलाइजर एसोसिएशन ऑफ इंडिया हर एक उर्वरक की कंपनी चाहें वो कॉपरेटिव हो, चाहे प्राइवेट हो या पीएसयू-हो, सभी कंपनियां किसानों के बीच प्रदर्शन व प्रचार- प्रसार के द्वारा अपने- अपने उत्पादों को पहुंचाने का काम करती हैं। लेकिन अब एफएआई की ओर से भी एक नई पहल की शुरुआत की जा रही है, जिसके तहत बड़ी संख्या में किसानों को एकजुट करके उर्वरकों के क्षेत्र में, कंपनियों द्वारा जो नवाचार किए जा रहे हैं, उनको भी किसानों तक पहुंचाने का काम एफएआई कर रही है। इसके अलावा अनुसंधान के माध्यम से आईसीएआर और कृषि विश्वविद्यालय की तरफ से जो नई शुरुआत हो रही है उसका प्रचार प्रसार करने का एक नया इनिशिएटिव हम शुरु कर रहे हैं। जिसका आगाज इस वर्ष उत्तर और दक्षिण भारत में किया जाएगा। इसके बाद हर उत्तर,पूर्व, पश्चिम व दक्षिण में एफएआई की ओर से किसानों के लिए इस नई पहल की शुरुआत की जाएगी । इसके माध्यम से हम किसानों के बीच नई तकनीकों की जानकारियां पहुंचाने का प्रयास करते रहेंगे।
- फसल / मृदा विशिष्ट उर्वरकों के लिए एफएआई की ओर से क्या कदम उठाए जा रहे हैं, जिससे किसानों को लाभ पहुंच सके?
आज बहुत व्यावासायिक उर्वरक बाजार में आ रहे हैं, नए फॉर्मूलेशन आ रहे हैं। नए ग्रेड आ रहे हैं, नए ग्रेड्स मिट्टी की उर्वरता को ध्यान में रखकर तैयार किए जा रहे हैं। इसके साथ ही सरकार की ओर से किसानों के लिए मृदा स्वास्थ्य कार्ड बनवाए जा रहे हैं। उसके अनुरूप एफएआई की ओर से 30-35 किसानों के लिए अलग –अलग जगह जागरुकता कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। इसके अंतर्गत कार्यकम्र आयोजित किए जाते हैं, कुछ ऑर्गेनिक फार्मिंग, कुछ बायोफ़र्टिलाइज़र, कुछ मिनरल फर्टिलाइजर संबंधित। साथ ही कुछ कार्यक्रम ऐसे होते हैं, जो विद्यार्थियों के लिए किए जाते हैं। मैं खुद एक मृदा वैज्ञानिक हूं, इन सभी कार्यकर्मों के माध्यम से इस बात का प्रयास किया जाता है कि मिट्टी के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए नये नावाचार करने में मदद मिल सके।
- एफएआई किसानों के लिए किन नई योजनाओं पर काम कर रही है?
फर्टिलाइज़र एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एफएआई) अपने विभिन्न विभागों के माध्यम से किसानों और कृषि क्षेत्र के लिए कई महत्वपूर्ण योजनाओं पर कार्य कर रही है। संस्था की कृषि, तकनीकी, विपणन और इकोनॉमिक्स विंग हैं, जिनके माध्यम से नीति निर्धारण, प्रशिक्षण और जागरूकता कार्यक्रम संचालित किए जाते हैं। इसके अतिरिक्त, एफएआई के क्षेत्रीय कार्यालयों द्वारा देश के विभिन्न हिस्सों में किसानों के लिए क्षेत्रीय स्तर पर कार्यक्रम चलाए जाते हैं।
एफएआई द्वारा प्रकाशित मासिक पत्रिका‘- खाद पत्रिका’ किसानों को उर्वरकों और खेती से जुड़ी नवीनतम जानकारी उपलब्ध कराती है। साथ ही, ‘फर्टिलाइज़र स्टैटिस्टिक्स’ नामक वार्षिक प्रकाशन देश और राज्यों में नीति-निर्धारण के लिए एक विश्वसनीय स्रोत के रूप में उपयोग की जाती है। संस्था, उर्वरकों से जुड़ी नीतियों और कानूनों को लेकर भी किसानों और कंपनियों को जागरूक करती है। भारत सरकार द्वारा निर्धारित उर्वरक नियंत्रण आदेश के तहत केवल उन्हीं उत्पादों को बाज़ार में बेचने की अनुमति है, जो अनुमोदित हों। इसके अलावा, हम शोध क्षेत्र में भी सक्रिय है और हर महीने इंडियन जनरल ऑफ फर्टिलाइजर प्रकाशित करते हैं, जो कृषि वैज्ञानिकों और उर्वरक कंपनियों के बीच काफी लोकप्रिय है।
एफएआई द्वारा #फ्रैंक नोट भी प्रकाशित किया जाता है, जिसमें उर्वरक क्षेत्र से जुड़े समसामयिक विचार और सुझाव सम्मलित किए जाते हैं। इस प्रकार, हम किसानों, कृषि वैज्ञानिकों, नीति निर्माताओं और कंपनियों के बीच एक महत्तवपूर्ण कड़ी हैं।
- इस वर्ष के एफएआई सेमिनार का विषय क्या है और इसमें क्या विशेष है?
एफएआई का वार्षिक सेमिनार पूरे देश में प्रतिष्ठा प्राप्त कार्यक्रम है, जिसमें उर्वरक एवं कृषि क्षेत्र के सभी प्रमुख स्टेकहोल्डर भाग लेते हैं। इस वर्ष की थीम “हरित भविष्य के लिए उर्वरक प्रबंधन” रखी गई है। इस विषय के माध्यम से यह समझाने का प्रयास है कि उर्वरकों का उत्पादन, वितरण और खेतों में उनका उपयोग किस प्रकार जलवायु पर प्रभाव डालता है। खेतों में उर्वरकों के उपयोग के बाद उत्सर्जित गैसें पर्यावरण को प्रभावित करती है, जिसका सीधा असर मानव स्वास्थ्य और जलवायु परिवर्तन पर होता है।
इस वर्ष की विशेष बात यह है कि सेमिनार में सभी चर्चाएं जलवायु परिवर्तन और पर्यावरणीय संतुलन के संदर्भ में केंद्रित रहेंगी। देश-विदेश से कंपनियों के प्रतिनिधि, नीति-निर्माता, वैज्ञानिक और उद्योग विशेषज्ञ इस आयोजन में शामिल होकर आने वाली चुनौतियों और उनके समाधान पर चर्चा करेंगे।
- ‘फसल क्रांति’ के माध्यम से किसानों के लिए आपका क्या संदेश है?
‘फसल क्रांति’ के माध्यम से मैं सभी किसान भाइयों को यह संदेश देना चाहता हूँ कि उर्वरकों का उपयोग संतुलित और विवेकपूर्ण ढंग से करें। केवल आवश्यकता के अनुसार ही उर्वरकों का इस्तेमाल करें और जैविक उर्वरकों को भी अपनाएं। इसके साथ ही, एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन को अपनाना आवश्यक है। मिट्टी के भीतर मौजूद सूक्ष्मजीवों की संख्या में गिरावट एक चिंता का विषय है। पहले बरसात के दौरान बड़ी संख्या में केंचुएं ज़मीन पर दिखते थे, लेकिन अब ऐसा कम देखने को मिलता है। किसानों को कम्पोस्ट खाद और बायो-फर्टिलाइज़र्स का उपयोग बढ़ाना चाहिए ताकि मिट्टी की सेहत बेहतर हो और उसमें सूक्ष्मजीवों की वृद्धि हो सके। हमारी संस्था किसानों को वैज्ञानिक पद्धतियों और पर्यावरण-अनुकूल तरीकों को अपनाने के लिए निरंतर प्रेरित करता रहेगा।

