उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले के धराली गांव में मंगलवार दोपहर करीब 2 बजे बादल फटने से आई भीषण बाढ़ के बाद हालात अभी भी गंभीर बने हुए हैं। इस आपदा में अब तक 5 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि सेना के 11 जवान लापता बताए जा रहे हैं। राहत की बात यह है कि अब तक करीब 190 लोगों को सुरक्षित बचा लिया गया है।
रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटी एजेंसियां
सेना, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और आईटीबीपी की टीमें राहत और बचाव कार्य में जुटी हुई हैं। सेना की 14वीं राजपुताना राइफल्स के कमांडिंग अफसर कर्नल हर्षवर्धन 150 जवानों के साथ मोर्चा संभाले हुए हैं। सेना ने ड्रोन, ट्रैकर डॉग्स और भारी मशीनों का इस्तेमाल कर राहत कार्यों को तेज किया है।
बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान
इस आपदा में हर्षिल का हेलीपैड बह गया है और कई रास्ते व पुल नष्ट हो गए हैं। गंगनानी क्षेत्र में स्थित एक वैली ब्रिज भी बाढ़ में बह गया है, जो गंगोत्री और हर्षिल को जोड़ता था। गंगोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग भटवाड़ी में दो स्थानों पर पूरी तरह बंद हो गया है।
मौसम ने बढ़ाई मुश्किलें
मौसम विभाग ने अगले 12 घंटों तक मौसम के और बिगड़ने की चेतावनी दी है। लगातार बारिश और भूस्खलन के कारण राहत कार्यों में बाधा आ रही है। ऋषिकेश-उत्तरकाशी हाईवे पर भूस्खलन के कारण रास्ता पूरी तरह अवरुद्ध हो गया है, जिससे एनडीआरएफ की तीन टीमें अब तक धराली नहीं पहुंच पाईं।
राजनीतिक नेतृत्व ने जताई संवेदना
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने धराली की त्रासदी पर दुख जताया है और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से बात कर स्थिति की जानकारी ली है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी इस घटना पर गहरा दुःख प्रकट किया है और राज्य सरकार को हर संभव मदद का आश्वासन दिया है।
ऐतिहासिक कल्प केदार मंदिर भी ध्वस्त
इस आपदा में धराली में स्थित 1500 साल पुराना कल्प केदार महादेव मंदिर भी मलबे में दफन हो गया है। यह मंदिर पंच केदार परंपरा से जुड़ा था और स्थानीय लोगों की आस्था का प्रमुख केंद्र था।
हिमाचल में भी चल रहा रेस्क्यू ऑपरेशन
इधर, हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले में किन्नौर कैलाश यात्रा पर फंसे 413 श्रद्धालुओं को आईटीबीपी ने सफलतापूर्वक सुरक्षित निकाला है 3। बाढ़ और भूस्खलन के कारण पैदल मार्ग पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुका था।
अगले 12 घंटे महत्वपूर्ण
मौसम विभाग की चेतावनी के मद्देनजर अगले 12 घंटे बेहद महत्वपूर्ण हैं। राहत एवं बचाव कार्यों में अब भी कई चुनौतियां बनी हुई हैं।

