छोटे और सीमांत किसानों के लिए सरकार की ओर से राहत की कई बड़ी घोषणाएं की गई हैं। प्राकृतिक आपदाओं में सहायता से लेकर रियायती ऋण योजनाओं और कृषि जागरूकता अभियानों तक, केंद्र सरकार ने किसानों के कल्याण को केंद्र में रखते हुए व्यापक कदम उठाए हैं।
आपदा प्रभावित किसानों को मिलेगी त्वरित राहत
राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन योजना (एनडीएमपी) के अनुसार, प्राकृतिक आपदा की स्थिति में राज्य सरकारें नुकसान का आकलन और राहत कार्यों को करती हैं, जबकि केंद्र सरकार लॉजिस्टिक और वित्तीय सहायता प्रदान करती है।
अगर आपदा को ‘गंभीर प्रकृति‘ की श्रेणी में रखा जाता है, तो राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया कोष (एनडीआरएफ) से अतिरिक्त वित्तीय सहायता दी जाती है, जिसका निर्णय अंतर-मंत्रालयी केंद्रीय दल (आईएमसीटी) की रिपोर्ट के आधार पर होता है।
राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष (एसडीआरएफ) और एनडीआरएफ के तहत मिलने वाली सहायता को राहत के रूप में दिया जाता है, न कि मुआवजे के रूप में। इसका उद्देश्य आपदा से प्रभावित किसानों को तुरंत आवश्यक मदद प्रदान करना है।
सस्ता और सुविधाजनक ऋण – अब 2 लाख तक मिलेगा कोलेटरल मुक्त लोन
कृषि ऋण सुविधा को और बेहतर बनाने के लिए केंद्र सरकार ने कोलेटरल मुक्त कृषि ऋण की सीमा को 1.6 लाख रुपये से बढ़ाकर 2 लाख रुपये प्रति किसान कर दिया है। यह नई व्यवस्था 1 जनवरी 2025 से लागू होगी, जिससे लाखों छोटे किसानों को राहत मिलेगी।
इसके साथ ही, सरकार देशभर में संशोधित ब्याज छूट योजना (एमआईएसएस) लागू कर रही है। इसके तहत:
- किसानों को 7% की रियायती ब्याज दर पर केसीसी (किसान क्रेडिट कार्ड) ऋण मिलता है।
- समय पर ऋण चुकाने पर 3% अतिरिक्त छूट दी जाती है, जिससे प्रभावी ब्याज दर घटकर केवल 4% प्रतिवर्ष हो जाती है।
- आपदा के समय पुनर्गठित ऋणों पर भी पहले वर्ष के लिए ब्याज सहायता मिलती है और गंभीर आपदाओं की स्थिति में यह सहायता पांच वर्षों तक दी जा सकती है।
कृषि जागरूकता के लिए देशव्यापी प्रचार अभियान
केंद्र सरकार किसानों तक योजनाओं की जानकारी और कृषि सलाह पहुँचाने के लिए एक मजबूत सूचना प्रणाली भी चला रही है। “कृषि विस्तार हेतु जनसंचार माध्यम सहायता योजना” के अंतर्गत:
- डीडी किसान, डीडी के 18 क्षेत्रीय केंद्र, और आकाशवाणी के 97 एफएम स्टेशन पर योजनाओं और सलाह का नियमित प्रसारण किया जा रहा है।
- साथ ही टीवी, रेडियो और समाचार पत्रों के माध्यम से भी प्रचार किया जा रहा है।
- सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म जैसे फेसबुक, एक्स (ट्विटर), यूट्यूब, व्हाट्सएप और पब्लिक ऐप आदि का उपयोग कर युवाओं और डिजिटल उपयोगकर्ताओं तक पहुंच सुनिश्चित की जा रही है।

