आम की पैदावार करने वाले किसानों के लिए यह वर्ष उम्मीदों भरा साबित हो रहा है। सरकार की ओर से न केवल उत्पादन में वृद्धि के आंकड़े सामने आए हैं, बल्कि किसानों को आर्थिक राहत देने और मूल्य स्थिरता बनाए रखने के लिए कई योजनाओं पर भी तेजी से काम किया जा रहा है।
उत्पादन में हुई बढ़ोतरी
वर्ष 2024-25 में आम का उत्पादन 228.37 लाख मीट्रिक टन तक पहुंचने की संभावना है, जो पिछले वर्ष 2023-24 के 223.98 लाख मीट्रिक टन के मुकाबले अधिक है। यह वृद्धि विशेष रूप से दक्षिण भारत के राज्यों में प्रसंस्करण योग्य किस्मों की बेहतर फसल के कारण संभव हो पाई है।
बाजार मूल्य में गिरावट पर मिलेगा संरक्षण
सरकार ने आम और अन्य शीघ्र नष्ट होने वाली फसलों के किसानों को बाजार मूल्य में गिरावट से होने वाले नुकसान से बचाने के लिए प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान (पीएम-आशा) के तहत बाजार हस्तक्षेप योजना (एमआईएस) को प्रभावी रूप से लागू किया है। इस योजना के तहत जब फसल का बाजार मूल्य न्यूनतम हस्तक्षेप मूल्य (एमआईपी) से नीचे चला जाता है, तो राज्य सरकार के अनुरोध पर केंद्र सरकार खरीद की मंजूरी देती है।
राज्य सरकारें इस योजना को तभी लागू कर सकती हैं, जब वे योजना के कार्यान्वयन में होने वाले नुकसान का कम से कम 50% (पूर्वोत्तर राज्यों के लिए 25%) वहन करने के लिए सहमत हों।
भावांतर भुगतान योजना से किसानों को मिलेगा सीधा लाभ
वर्ष 2024-25 से एक नई पहल ‘भावांतर भुगतान योजना (पीडीपी)‘ को भी एमआईएस में जोड़ा गया है। इसके तहत, किसानों को बिक्री मूल्य और एमआईपी के बीच का अंतर सीधे उनके बैंक खातों में भुगतान किया जाएगा। इससे किसानों को अपनी उपज के लिए न्यूनतम लाभकारी मूल्य सुनिश्चित किया जा सकेगा, भले ही बाजार में कीमतें कम क्यों न हों।
बागवानी क्षेत्र में समेकित सहायता
आम जैसे बागवानी उत्पादों के व्यापक विकास के लिए सरकार मिशन फॉर इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट ऑफ हॉर्टिकल्चर (एमआईडीएच) चला रही है। इसके अंतर्गत नर्सरी विकास, उत्पादन, फसलोपरांत प्रबंधन, प्रसंस्करण और विपणन हेतु आवश्यक बुनियादी ढांचे का निर्माण किया जा रहा है।
निर्यात को बढ़ावा देने के लिए एपीडा, एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर फंड (AIF) और एमआईडीएच जैसे प्लेटफॉर्म के माध्यम से पैकहाउस और प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित करने में भी सहायता दी जा रही है।
अनुसंधान और नई किस्मों पर ज़ोर
आईसीएआर और उससे जुड़े संस्थानों जैसे केंद्रीय उपोष्णकटिबंधीय बागवानी संस्थान, भारतीय बागवानी अनुसंधान संस्थान, और भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान द्वारा आम पर गहन अनुसंधान किया जा रहा है। अब तक आम की लगभग एक दर्जन व्यावसायिक किस्में विकसित की जा चुकी हैं, जो उत्पादन, स्वाद और भंडारण के लिहाज से श्रेष्ठ हैं।
वर्तमान में आईसीएआर देशभर में आम पर केंद्रित 23 अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजना (AICRP) केंद्र चला रहा है। इसके साथ ही, राज्य कृषि विश्वविद्यालय भी उत्पादन, मूल्य संवर्धन और फसलोपरांत तकनीकों के क्षेत्र में सक्रिय हैं।

