ֆ:पीपरचेड़ी परियोजना की शुरुआत 1977 में घुंघुट्टी नाले पर बांध निर्माण के साथ हुई थी, जिसका उद्देश्य क्षेत्र के किसानों को सिंचाई का स्थायी स्रोत देना था। लेकिन 1980 में लागू हुए वन अधिनियम के कारण इसे पर्यावरणीय मंजूरी नहीं मिल पाई और कार्य पूरी तरह रुक गया। इसके बाद से यह योजना चार दशक से अधिक समय तक अधूरी ही रह गई और किसानों की उम्मीदें भी टूटने लगीं।
§ֆ:हाल ही में केंद्र सरकार से इस परियोजना को पर्यावरणीय स्वीकृति मिल गई है। इसके बाद मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने ‘सुशासन तिहार समाधान शिविर’ के दौरान इस परियोजना की पुनः शुरुआत की औपचारिक घोषणा की। उन्होंने कहा, “यह केवल एक सिंचाई परियोजना नहीं, बल्कि हमारे किसानों के संघर्ष, धैर्य और उम्मीद की जीत है। यही सुशासन तिहार का असली उद्देश्य है लोगों के जीवन में वास्तविक परिवर्तन लाना।”
§ֆ:परियोजना के पूरा होने के बाद, क्षेत्र के किसान अब बरसात पर निर्भर नहीं रहेंगे और साल भर उन्हें सिंचाई के लिए पानी मिल सकेगा। इससे फसल उत्पादन में वृद्धि के साथ-साथ उनकी आर्थिक स्थिति भी सशक्त होगी। स्थानीय लोग इसे क्षेत्रीय विकास की दिशा में एक बड़ा कदम मान रहे हैं।
§ֆ:हालांकि, किसानों की खुशी के बीच यह चिंता भी बनी हुई है कि क्या यह परियोजना समय पर पूरी हो पाएगी और क्या इसके लाभ सभी पात्र किसानों तक पहुंच सकेंगे। स्थानीय लोग उम्मीद कर रहे हैं कि मुख्यमंत्री की घोषणा सिर्फ कागज़ों तक सीमित न रह जाए, बल्कि यह योजना धरातल पर भी उतरे और वर्षों का इंतज़ार अब खत्म हो। पीपरचेड़ी सिंचाई परियोजना का पुनरारंभ न सिर्फ कृषि क्षेत्र के लिए बल्कि पूरे क्षेत्र के विकास के लिए एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है।
§छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में दशकों से लंबित पड़ी पीपरचेड़ी सिंचाई परियोजना को आखिरकार 45 साल बाद पुनर्जीवित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस बहुप्रतीक्षित परियोजना को शीघ्र शुरू समय पर पूरा करने के निर्देश दिए हैं। परियोजना के शुरू होने से मडेली गांव और आसपास के क्षेत्रों के 5000 से अधिक किसानों को स्थायी सिंचाई की सुविधा मिल सकेगी, जिससे उनकी खेती की उत्पादकता और आमदनी में इजाफा होगा।

