केंद्र सरकार ने देश में मत्स्य पालन और जलीय कृषि के समग्र विकास के साथ-साथ मछुआरा समुदाय के सशक्तिकरण के लिए पिछले वर्षों में कई योजनाएं और कार्यक्रम लागू किए हैं। मत्स्य पालन विभाग, मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय के अंतर्गत, इन योजनाओं को क्रियान्वित कर रहा है, जिनका उद्देश्य उत्पादन, अवसंरचना, विपणन और मछुआरों के कल्याण में व्यापक सुधार लाना है।
ब्लू रेवोल्यूशन योजना के तहत वर्ष 2015-16 से 2019-20 तक ₹3,000 करोड़ के केंद्रीय प्रावधान के साथ मत्स्य क्षेत्र का एकीकृत विकास किया गया, जिससे लगभग ₹5,000 करोड़ का निवेश इस क्षेत्र में आया। इसके बाद मत्स्य एवं जलीय कृषि अवसंरचना विकास कोष (FIDF) 2018-19 में शुरू किया गया, जिसकी कुल निधि ₹7,522.48 करोड़ है। इसके जरिए पात्र इकाइयों, राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को 12 साल की अवधि (2 साल की मोहलत सहित) के लिए रियायती ब्याज दर पर वित्त उपलब्ध कराया जाता है।
वर्ष 2020-21 में शुरू हुई प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) ₹20,050 करोड़ के अनुमानित निवेश के साथ, मछली उत्पादन में बढ़ोतरी, गुणवत्ता सुधार, तकनीकी उन्नयन, पोस्ट-हार्वेस्ट प्रबंधन और मछुआरों के कल्याण पर केंद्रित है। इस योजना के तहत मछुआरों को बीमा सुविधा, प्रशिक्षण, कौशल विकास और क्षमता निर्माण का भी प्रावधान है।
मत्स्य क्षेत्र को औपचारिक और अधिक लचीला बनाने के लिए प्रधानमंत्री मत्स्य किसान समृद्धि सह योजना (PMMKSSY) भी लागू की गई है, जिसके तहत ₹6,000 करोड़ का निवेश किया जा रहा है। इसका उद्देश्य जलीय कृषि बीमा को प्रोत्साहित करना, सूक्ष्म और लघु मत्स्य उद्यमों की दक्षता बढ़ाना, सुरक्षा एवं गुणवत्ता प्रणाली अपनाना और मूल्य श्रृंखला को सुदृढ़ बनाना है।
इसके अलावा, 2018-19 से मछुआरों और मत्स्य किसानों को किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है, जिससे वे कार्यशील पूंजी की जरूरतें पूरी कर सकें। पिछले पांच वर्षों में PMMSY के तहत 3,028 वेबिनार, कार्यशालाएं और प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित हुए, जिनसे 2,92,315 मछुआरे, उद्यमी और तटीय युवा लाभान्वित हुए।
पोस्ट-हार्वेस्ट अवसंरचना को मजबूत करने के लिए भी व्यापक कार्य किए गए हैं। वित्तीय वर्ष 2020-21 से 2024-25 के बीच 734 कोल्ड स्टोरेज और आइस प्लांट, 27,301 मछली परिवहन साधन, 6,410 मछली कियोस्क, 202 खुदरा मछली बाजार और 21 थोक मछली बाजार स्वीकृत किए गए, जिन पर ₹2,375.25 करोड़ का व्यय हुआ।
उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले में उपलब्ध तालाबों, जलाशयों और अन्य जल स्रोतों का मत्स्य पालन के लिए अधिकतम उपयोग किया गया है। यहां बायोफ्लॉक तालाब, री-सर्कुलेटरी एक्वाकल्चर सिस्टम, लाइव फिश वेंडिंग यूनिट और थोक मछली बाजार जैसी परियोजनाएं लागू की गई हैं। इनसे स्थानीय मछुआरों की आय में वृद्धि और रोजगार के अवसरों में विस्तार हुआ है।
मत्स्य पालन विभाग का मानना है कि इन योजनाओं से आने वाले वर्षों में न केवल मछली उत्पादन में वृद्धि होगी, बल्कि मछुआरा समुदाय का जीवन स्तर भी बेहतर होगा और देश के मत्स्य क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने की क्षमता विकसित होगी।

