֍:कब करें बुवाई§ֆ:मटर की बुवाई अक्टूबर से नवंबर महीने तक की जाती है. हालांकि, पहाड़ी क्षेत्रों में ठंडक ज्यादा होने से वहां इसकी खेती गर्मियों में भी हो जाती है. बता दें कि बुवाई करते समय पौध के बीच की दूरी 20 से 25 सेमी की दूरी पर पंक्तियों में करनी चाहिए. पंक्तियों के बीच की दूरी 20 से 25 सेमी रखी जाती है. यदि बुवाई के बाद बीज बहुत घने हों तो उन्हें अंकुरण के बाद पतला कर देना चाहिए.§֍:मटर की तीन उन्नत किस्में§ֆ:भारत में मटर की कई किस्में मौजूद हैं, जो कि किसान कई सालों से खेत में लगा रहे हैं. लेकिन आज हम आपको ऐसी तीन किस्मों के बारे में अवगत कराएंगे, जिनकी उत्पादन क्षमता सामान्य मटर की किस्मों से अधिक है.§֍:नरेंद्र वेजिटेबल मटर-6 -: §ֆ:मटर की ये किस्म मीडियम आकार में पकने वाली किस्म है. इसके पौधे 45-55 सेमी लंबे होते हैं. साथ ही पहला फूल 30-35 दिनों के बाद आता है. इस किस्म की फलियां बुवाई के 60-70 दिन बाद काटी जा सकती हैं. फलियां 8 सेमी लंबी होती हैं और उनमें 7-8 हरे मीठे बीज होते हैं. इस किस्म की उत्पादन क्षमता 85-95 क्विंटल/हेक्टेयर है.§֍:वी.एल. मटर-3 -: §ֆ:यह मध्य पकने वाली किस्म है. इस किस्म की मटर के पौधों की ग्रोथ सीमित होती है और पत्ते हल्के हरे रंग के होते हैं. इसकी फलियां हल्के हरे रंग में होती हैं. उत्पादन क्षमता की बात करें तो 100-105 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है.§֍:नरेंद्र वेजिटेबल मटर-4 -: §ֆ:यह मध्य पकने वाली किस्म है. इस किस्म के पौधे 70-75 सेमी लंबे होते हैं. तने 8-9 सेमी लंबे होते हैं और इनमें 7-8 हरे मीठे बीज होते हैं. इस किस्म की उत्पादन क्षमता 100-110 क्विंटल/हेक्टेयर है.§भारत में किसान कई सालों से हरी मटर की खेती कर रहे हैं. कई राज्यों में मटर की खेती का रकबा भी काफी बड़ा है. इसकी खेती ठंडी जलवायु में की जाती है. मटर की खेती मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, राज्स्थाव, महाराष्ट्र, बिहार और कर्नाटक में की जाती है. इस फसल की बुवाई अक्टूबर से नवंबर महीने तक हो जाती है. आज आपको बताएंगे मटर की तीन उन्नत किस्मों के बारे में जो अधिक उपज देती है.

