राजधानी दिल्ली बुधवार शाम हुई मूसलधार बारिश के बाद एक बार फिर पानी-पानी हो गई। उत्तरी दिल्ली से लेकर एनसीआर के गुरुग्राम तक कई इलाके जलमग्न हो गए। सड़कें तालाब बन गईं, रिहायशी कॉलोनियों में पानी घुस गया और यातायात पूरी तरह ठप हो गया। हालात इतने बिगड़े कि एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं—क्या दिल्ली मॉनसून के लिए कभी तैयार होती है?
दिल्ली में जलभराव को लेकर टेंशन में रेखा गुप्ता
हालात पर मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा, “हर साल करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं, फिर भी पहली ही बारिश में शहर थम जाता है। यह अस्वीकार्य है।” सीएम ने संबंधित विभागों को फटकार लगाते हुए जलभराव रोकने के लिए तत्काल और प्रभावी कदम उठाने के निर्देश दिए हैं।
दिल्ली के हालातों में आया सुधार
हालांकि, मुख्यमंत्री ने इस बात पर संतोष जताया कि इस बार मिंटो रोड और आईटीओ जैसे संवेदनशील इलाकों में जलभराव की समस्या नहीं देखी गई। उन्होंने कहा, “यह दिखाता है कि सही प्लानिंग और क्रियान्वयन हो तो परिणाम मिल सकते हैं। यही कार्यकुशलता पूरे शहर में होनी चाहिए।”
जल निकासी के लिए कई एजेंसियां, फिर भी हालात वही
दिल्ली में जल निकासी और सीवेज प्रबंधन का जिम्मा कई एजेंसियों के पास है—MCD, NDMC, PWD, दिल्ली जल बोर्ड, DDA और सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग। लेकिन यह बहु-एजेंसी प्रणाली ही अक्सर जिम्मेदारी से बचने का बहाना बन जाती है।
बारिश ने एक बार फिर दिखा दिया कि कागज़ी तैयारियों और जमीनी हकीकत में बड़ा फर्क है। छह महीने पहले शुरू होने वाली मॉनसून तैयारियां पहले ही दिन नाकाम होती दिखीं।
जनता बेहाल, सिस्टम सवालों के घेरे में
पानी में फंसे वाहन, जाम में घंटों फंसी एंबुलेंस और घुटनों तक पानी में चलने को मजबूर लोग—दिल्ली की ये तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं। हर साल ऐसे ही हालात देखने को मिलते हैं, लेकिन समाधान के नाम पर सिर्फ बैठकें और प्रेस कॉन्फ्रेंस होती हैं।अब देखना होगा कि मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की सख्ती इस बार सच में कुछ बदलती है या दिल्ली की बारिश से लड़ाई अगले साल फिर से यहीं लौट आएगी।

