§ֆ:इस समारोह में हजारों किसानों, कृषि विशेषज्ञों, वैज्ञानिकों, छात्रों और विस्तार अधिकारियों ने भाग लिया। इसका उद्देश्य कृषि नीतियों और नवाचारों को किसानों तक पहुँचाना और नई तकनीकों व सरकारी योजनाओं के प्रति जागरूकता फैलाना रहा। अपने संबोधन में केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने पंजाब की उर्वर भूमि को नमन करते हुए यहाँ के किसानों को देश का अन्नदाता बताया। उन्होंने धान की सीधी बुवाई (Direct Seeding of Rice) तकनीक को प्राकृतिक संसाधनों विशेष रूप से भूजल संरक्षण के लिए “संजीवनी” करार दिया। उन्होंने कहा कि देश के 16,000 कृषि वैज्ञानिकों को प्रयोगशालाओं से निकलकर खेतों में जाकर किसानों की समस्याओं को समझने और उसी आधार पर अनुसंधान करने की आवश्यकता है।
§ֆ:उन्होंने गेहूं, मक्का, सोयाबीन और मूंगफली जैसी फसलों में भारत की उत्कृष्ट उत्पादकता का उल्लेख करते हुए दालों की खेती पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता जताई। साथ ही रसायनों का संतुलित उपयोग, कृषि प्रसंस्करण और किसानों के लिए अनुकूल एआई व रिमोट तकनीकों के अपनाने पर बल दिया। उन्होंने नदियों के जल का विवेकपूर्ण उपयोग और जल संसाधनों की बेहतर योजना बनाने की बात कही।पंजाब के कृषि मंत्री सरदार गुरमीत सिंह खुड्डियां ने इसे भारतीय कृषि के लिए ऐतिहासिक क्षण बताया और किसानों की पारंपरिक ज्ञान व पर्यावरण संरक्षण की समझ की सराहना की। उन्होंने पराली प्रबंधन और गेहूं-धान फसल चक्र को बदलने की जरूरत को रेखांकित करते हुए पंजाब के कृषि हितों को प्राथमिकता देने की अपील की। आईसीएआर के महानिदेशक डॉ. एम.एल. जात ने कहा कि इस आयोजन का उद्देश्य शोध को व्यावहारिक रूप में किसानों के लिए लाभकारी बनाना है और पंजाब के किसानों के वैश्विक योगदान की सराहना की। पीएयू के कुलपति डॉ. सतबीर सिंह गोसल ने अपने स्वागत भाषण में अभियान को कृषि विकास की दिशा में एक अहम पहल बताया और विश्वविद्यालय की तकनीकों को गाँव-गाँव तक पहुँचाने की प्रतिबद्धता दोहराई।
§ֆ:उन्होंने किसानों से फीडबैक साझा करने का आह्वान किया ताकि शोध कार्य जमीनी हकीकतों के अनुरूप हो सके। कार्यक्रम का संचालन पीएयू के अतिरिक्त निदेशक (संचार) डॉ. तजिंदर सिंह रियार और सहयोगी निदेशक (जनसंपर्क) डॉ. कुलदीप सिंह ने किया। तकनीकी सत्र में पीएयू के विशेषज्ञों ने किसानों को वर्तमान फसल चक्र से जुड़ी समस्याओं और उनके समाधान पर जानकारी दी। इस अवसर पर पीएयू के विभिन्न विभागों द्वारा अपनी शोध एवं विस्तार गतिविधियों की प्रदर्शनी भी लगाई गई, जिसे उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों ने सराहा और विश्वविद्यालय के नवाचार प्रयासों की प्रशंसा की।
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