֍:1 हफ्ते में 10% टूटे हैं दाम§ֆ:सूत्रों ने कहा कि पिछले एक महीने में सोयाबीन, सीपीओ और पामोलीन तेल के दाम लगभग 10 फीसदी टूटे हैं। जब इन तेलों के दाम में करीब आठ फीसदी की तेजी आई थी, तो विश्लेषकों ने हाहाकार मचाया था। अब जब दाम 10 फीसदी टूटे हैं, तो उन्हें बाजार पर होने वाले असर के बारे में भी बोलना चाहिये। उन्होंने कहा कि जिस हिसाब से दाम टूटे हैं और न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से कम दाम पर देशी तिलहनों की थोक खरीद हो रही है, उस हिसाब से खुदरा में पामोलीन, सूरजमुखी और सोयाबीन तेल 100-102 रुपये लीटर के भाव मिलना चाहिए।
§֍:सरसों भी एमएसपी से नीचे खरीदी जा रही§ֆ:सरसों भी एमएसपी से नीचे दाम पर खरीदा जा रहा है और खरीद भाव के हिसाब से सरसों तेल का खुदरा दाम भी 110-112 रुपये लीटर बिकना चाहिए। इन विशेषज्ञों को बाजार में खाद्यतेलों के खुदरा दाम ऊंचे क्यों है, इसके निवारण का क्या रास्ता है, कम से कम इस बारे में अपनी राय देनी चाहिए। सूत्रों के मुताबिक, बिनौले के नकली खल के फल-फूल रहे कारोबार पर रोक लगाने की ओर ध्यान देना चाहिये। ऐसा करना कपास उत्पादन बढ़ाने के लिए भी जरूरी है।
§विदेश में गिरावट के रुख तथा आयातित तेलों के थोक दाम टूटने के बीच गुरुवार को सरसों, मूंगफली एवं सोयाबीन तेल तिलहन, कच्चा पामतेल (CPO) एवं पामोलीन तथा बिनौलतेल के थोक दाम नुकसान में रहे। बाजार सूत्रों ने इस गिरावट को ऑयल इंडस्ट्री के लिए बड़ा संकट बताया। उन्होंने कहा कि शिकागो एक्सचेंज बुधवार रात करीब 1.5 फीसदी टूटा था और फिलहाल यहां गिरावट है। मलेशिया एक्सचेंज में 1.5-2 फीसदी की गिरावट चल रही है। विदेशी बाजारों के टूटने से खाद्यतेलों के भाव पर दवाब कायम हो गया।

