֍:ऐसे होती है खेती§ֆ:किसानों ने बताया कि तंबाकू का बीज बाज़ार में उपलब्ध नहीं होता। इसे पौधे में मौजूद छोटे से फल से निकाला जाता है और काट कर सुखाया जाता है। फिर बीज तैयार होता है। बीज लगाने के एक महीने बाद तंबाकू की पली निकाल कर उनकी रोपाई की जाती है। कमोबेश तीन महीने के बाद फसल कटाई के लिए तैयार हो जाती है।
कटाई के बाद तंबाकू की फसलों को 5 से 6 महीनों तक सूखने के लिए रख दिया जाता है। तंबाकू के पत्तों के सूखने के बाद उन्हें काटकर बंडलों में भरकर मंडी तक पहुँचाया जाता है जहां उन्हें 80 से 90 रुपये प्रति किलो के भाव से बेच दिया जाता है। तंबाकू के पत्तों से खैनी और ज़र्दा बनाया जाता है वहीं, इसकी डंडियाँ गुल बनाने के काम आती हैं।
§֍:क्या कहते हैं आंकड़ें§ֆ:सेहत के लिए हानिकारक होने के बावजूद तंबाकू उगाने वाले देशों में भारत का नाम शामिल है। केंद्रीय तंबाकू अनुसंधान संस्थान के आंकड़ों के अनुसार, भारत ब्राज़ील के बाद विश्व में तंबाकू निर्यात करने वाला दूसरा सबसे बड़ा देश है।
तंबाकू उद्योग 3 करोड़ 60 लाख भारतीयों को रोज़गार देता है जिनमें दो करोड़ 60 लाख केवल किसान और खेत के मज़दूरों की संख्या है, जबकि बाकी 10 लाख लोग तंबाकू के उत्पाद जैसे खैनी, बीड़ी , गुल आदि बनाते हैं। देश में हो रहे सभी कृषि निर्यात का चार प्रतिशत हिस्सा तंबाकू से संबंधित है।
§भारत में तंबाकू की खेती लंबे समय से की जा रही है. तंबाकू की खेती करने वाले किसानों के लिए तमाम सूचनाएं सरकार की ओर से भी जारी की जाती हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं तंबाकू की खेती में भारत ब्राजील के बाद दूसरा सबसे बड़ा देश बन गया है. तो आइये जानते हैं कैसे होती है तंबाकू की खेती, कहा के किसानों को मिल रहा इसकी खेती से तगड़ा मुनाफा……

