ओडिशा सरकार ने जनजातीय बहुल सुंदरगढ़ ज़िले में खरीफ मौसम 2025 के लिए कृषि योग्य भूमि का नया मूल्यांकन कर दिया है। अब खेती के लिए वास्तविक रूप से उपलब्ध भूमि के आधार पर फसल योजना तैयार की जा रही है। इस कदम का उद्देश्य खरीफ फसलों के लिए अधिक सटीक और व्यावहारिक फसल योजना सुनिश्चित करना है। नए आंकड़ों के अनुसार, सुंदरगढ़ जिले की कुल 3,12,930 हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि में से अब केवल 3,02,690 हेक्टेयर भूमि को खेती योग्य माना गया है।
इस तरह लगभग 10,240 हेक्टेयर भूमि को खेती के दायरे से बाहर कर दिया गया है, क्योंकि इन जमीनों का उपयोग अब कृषि के लिए नहीं हो रहा है। माना जा रहा है कि पिछले डेढ़ दशक में यह भूमि खनन, उद्योग और अन्य विकास परियोजनाओं के लिए अधिग्रहित की गई थी। मुख्य सचिव द्वारा 28 मई को सभी जिलाधिकारियों को भेजे गए पत्र में कृषि विभाग द्वारा तैयार किया गया खरीफ फसल कार्यक्रम 2025 साझा किया गया है, जिसमें सुंदरगढ़ के लिए संशोधित आंकड़े शामिल हैं। अनुमान है कि इस साल जिले में 1.98 लाख हेक्टेयर भूमि पर धान की खेती और 1.04 लाख हेक्टेयर भूमि पर गैर-धान फसलों की बुवाई की जाएगी।
राजस्व विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि कृषि भूमि के पुनर्गठन का आधार हाल ही में हुए कृषि जनगणना के आंकड़े हैं। यह सर्वे योजना, राजस्व और कृषि विभाग के सांख्यिकी प्रभाग के सहयोग से किया गया था। हालांकि राजस्व और कृषि विभाग इस भूमि हानि पर टिप्पणी करने से बच रहे हैं, लेकिन जल्द ही जिला कृषि रणनीति समिति (DASC) की बैठक में खरीफ फसल कार्यक्रम को अंतिम रूप दिए जाने की संभावना है।
वहीं कृषि विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि भूमि में 10,240 हेक्टेयर की कमी के बावजूद सुंदरगढ़ की कुल खाद्य उत्पादन क्षमता पर कोई गंभीर असर नहीं पड़ेगा। उन्होंने बताया कि जिले में करीब 29,000 हेक्टेयर क्षेत्र में मेगा लिफ्ट सिंचाई परियोजनाओं के माध्यम से सुनिश्चित सिंचाई सुविधा दी जा रही है। इससे खेती की आवृत्ति और उत्पादन क्षमता में वृद्धि हुई है। साथ ही, आधुनिक खेती के तौर-तरीकों को अपनाने पर भी जोर दिया जा रहा है।
गौरतलब है कि वर्ष 2022 में जिला प्रशासन ने एक सर्वेक्षण किया था, जिसमें जिले के चार प्रखंडों में लगभग 4,000 हेक्टेयर कृषि भूमि के नुकसान की पुष्टि हुई थी। इसमें हेमगिर ब्लॉक में करीब 2,600 हेक्टेयर भूमि, कोइड़ा में 700 हेक्टेयर, सुंदरगढ़ सदर में 600 हेक्टेयर और गुरुंडिया में 100 हेक्टेयर भूमि कृषि प्रयोजन से बाहर हो चुकी थी। सरकार के इस नवीनतम निर्णय से कृषि नीति नियोजन को अधिक व्यावहारिक और भूमि उपयोग की वास्तविक स्थिति के अनुरूप बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है।

