कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने खरीफ फसलों की अब तक की बुवाई की स्थिति पर आधारित आंकड़े जारी किए हैं। 25 जुलाई 2025 तक देशभर में कुल 829.64 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में खरीफ फसलों की बुवाई हो चुकी है, जो पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में 31.73 लाख हेक्टेयर अधिक है। यह आंकड़ा किसानों के उत्साह और अनुकूल मानसून की पुष्टि करता है।
धान की खेती में जबरदस्त बढ़ोतरी
धान (चावल) की बुवाई इस वर्ष अब तक 245.13 लाख हेक्टेयर में की गई है, जबकि पिछले वर्ष यह आंकड़ा 216.16 लाख हेक्टेयर था। यानी इस बार धान की बुवाई 28.97 लाख हेक्टेयर ज्यादा हुई है, जो किसानों की प्राथमिकता और अच्छी वर्षा का संकेत है।
दालों में मिश्रित रुझान
दालों की कुल बुवाई 93.05 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गई है, जो पिछले साल से 3.11 लाख हेक्टेयर ज्यादा है।
- मूंग की बुवाई में सर्वाधिक 4.24 लाख हेक्टेयर की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
- माठ (माठा बीन्स) की बुवाई भी 3.08 लाख हेक्टेयर बढ़ी है।
हालांकि, अरहर (तूर) और उड़द की बुवाई में क्रमशः 3.10 लाख हेक्टेयर और 1.20 लाख हेक्टेयर की गिरावट देखी गई है।
मोटे अनाज में सुधार, मक्का आगे
मोटे अनाज की कुल बुवाई 160.72 लाख हेक्टेयर में हुई है, जो पिछले साल की तुलना में 5.75 लाख हेक्टेयर ज्यादा है।
- मक्का की बुवाई में 6.66 लाख हेक्टेयर की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।
- हालांकि, रागी और अन्य छोटे बाजरे की बुवाई में थोड़ी गिरावट देखी गई है।
तिलहन फसलों में आंशिक गिरावट
तिलहन फसलों की कुल बुवाई 166.89 लाख हेक्टेयर रही है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 3.83 लाख हेक्टेयर कम है।
- सोयाबीन की बुवाई में सबसे अधिक 4.68 लाख हेक्टेयर की कमी आई है।
- हालांकि, मूंगफली, तिल और अरंडी जैसी फसलों की बुवाई में वृद्धि देखी गई है।
गन्ना और कपास की स्थिति
गन्ने की बुवाई में हल्की वृद्धि हुई है और अब तक 55.16 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बुवाई हो चुकी है।
वहीं, कपास की बुवाई में 2.37 लाख हेक्टेयर की कमी दर्ज की गई है, जबकि जूट और मेस्ता की बुवाई में भी मामूली गिरावट देखी गई है।
कुल मिलाकर स्थिति उत्साहवर्धक
कुल 1096.65 लाख हेक्टेयर के सामान्य क्षेत्रफल की तुलना में अब तक 829.64 लाख हेक्टेयर में बुवाई हो चुकी है। यह दर्शाता है कि खरीफ सीजन में देशभर के किसान जोर-शोर से खेती में जुटे हुए हैं। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, यदि मानसून की स्थिति अनुकूल बनी रही, तो इस वर्ष खाद्यान्न उत्पादन में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की उम्मीद है।

