केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि “विकसित कृषि संकल्प अभियान” कोई औपचारिक आयोजन नहीं है, बल्कि यह किसानों की दशा सुधारने के लिए वैज्ञानिकों का एक समर्पित प्रयास है। वे यह बात भारतीय सब्ज़ी अनुसंधान संस्थान (IIVR), वाराणसी में वैज्ञानिकों के साथ आयोजित एक समीक्षा बैठक में कह रहे थे।
किसानों की जरूरतों पर आधारित अनुसंधान की जरूरत
केंद्रीय कृषि मंत्री ने देशभर में चल रहे विकसित कृषि संकल्प अभियान की सफलता की सराहना की और किसानों तक बेहतर तकनीक और उत्पादों की पहुंच बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने सब्जी उत्पादन को बढ़ाने के लिए जीनोम एडिटिंग, बीज उपचार, जैविक खेती और प्राकृतिक खेती जैसी तकनीकों को आवश्यक बताया।
उन्होंने वैज्ञानिकों से कहा कि अनुसंधान कार्य किसानों की ज़मीनी ज़रूरतों के अनुसार होने चाहिए। इस दिशा में “लैब से भूमि तक” कार्यक्रम को उन्होंने एक सकारात्मक पहल बताया, जो अनुसंधान को किसानों के हित में लाने में सहायक है।
कृषकों की समस्याओं का समाधान प्राथमिकता
केंद्रीय मंत्री ने विशेष रूप से किसानों को नकली उर्वरकों, मानक से नीचे बीजों, और हानिकारक कीटनाशकों से बचाने की जरूरत पर बल दिया। उन्होंने कहा कि इन समस्याओं से निपटने के लिए एक प्रभावी योजना बनाई जानी चाहिए।
बैठक में दिए गए प्रमुख सुझाव:
- टमाटर की शेल्फ लाइफ बढ़ाने के लिए अनुसंधान
- निर्यात योग्य एवं सूखे पाउडर में बदलने योग्य फसलों का विकास
- जैविक और पारंपरिक खेती से जुड़े वैज्ञानिक तथ्यों का डाटा संग्रहण
- जीन एडिटिंग पर अनुसंधान में तेजी लाना
- किसानों के अनुसार अनुसंधान कार्य करना
- किसान-नवाचारों को बढ़ावा देना
इसके अलावा केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि राज्य कृषि विभागों, कृषि विज्ञान केंद्रों (KVKs) और अन्य संबंधित विभागों के बीच बेहतर तालमेल जरूरी है, ताकि किसानों को एकीकृत लाभ मिल सके।
यह समीक्षा बैठक किसानों की आमदनी बढ़ाने और टिकाऊ कृषि प्रणाली को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।

