जिंदल स्टील एंड पावर (JSP) के चेयरमैन और कुरुक्षेत्र से तीसरी बार सांसद बने नवीन जिंदल की दूरदर्शी सोच को आगे बढ़ाते हुए जिंदल फाउंडेशन ने अंगुल जिले में ‘जिंदल कृषि सेवा’ नामक एक नई पहल की शुरुआत की है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य रासायनिक खाद और कीटनाशकों से मुक्त प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देना और किसानों को सशक्त बनाना है। इस परियोजना का शुभारंभ जिंदल फाउंडेशन की चेयरपर्सन श्रीमती शालू जिंदल ने एक मोबाइल सॉयल टेस्टिंग वैन को हरी झंडी दिखाकर किया। यह वैन गांव-गांव जाकर मिट्टी की गुणवत्ता की जांच करेगी और किसानों को उनकी ज़मीन की उर्वरता के आधार पर आवश्यक प्राकृतिक पोषक तत्वों की जानकारी देगी।इस मौके पर अंगुल के मुख्य जिला कृषि अधिकारी उमाशंकर मिश्रा, उप निदेशक बागवानी अंबर लुबुन, नाबार्ड के जिला विकास प्रबंधक अशुतोष रॉय, कृषि विज्ञान केंद्र-अंगुल के प्रमुख वैज्ञानिक डॉ. देबाशीष मिश्रा, जेएसपी के कार्यकारी निदेशक पंकज मल्हान, सीएसआर और शिक्षा विभाग प्रमुख श्री प्रशांत कुमार होता, 300 से अधिक किसान, सरकारी अधिकारी और कृषि विशेषज्ञ उपस्थित रहे।
प्राकृतिक खेती को मिलेगा नया आयाम
कार्यक्रम के दौरान श्रीमती शालू जिंदल ने बताया कि ‘जिंदल कृषि सेवा’ एक समेकित मंच है, जो किसानों को प्राकृतिक खेती से जुड़ी सभी आवश्यक जानकारियाँ और संसाधन प्रदान करेगा। इस पहल में प्राकृतिक बीज उपचार, कम्पोस्ट, वर्मी कल्चर, गोबर, गोमूत्र और जैव उर्वरकों के उपयोग को बढ़ावा दिया जाएगा। साथ ही, आधुनिक कृषि यंत्रों का प्रयोग और फसल विविधिकरण के सही तरीके अपनाने पर भी ज़ोर दिया जाएगा।उन्होंने कहा, “हमारा उद्देश्य न केवल किसानों की आय बढ़ाना है, बल्कि पर्यावरण संतुलन, खाद्य सुरक्षा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूत करना है।”
महिला किसानों की बढ़ती भागीदारी
उन्होंने महिला किसानों की सक्रिय भागीदारी की सराहना की, जो प्राकृतिक खेती, मिलेट उत्पादन और मिलेट आधारित खाद्य उत्पादों के मूल्यवर्धन में अग्रणी भूमिका निभा रही हैं। उन्होंने महिला किसानों से संवाद करते हुए कहा कि भोजन में सहजन और सहजन की पत्तियों के उपयोग को बढ़ावा दें और परिष्कृत तेल, मैदा व चीनी का त्याग करें।
मिट्टी की जांच से मिलेगा लाभ
मोबाइल सॉयल टेस्टिंग वैन एक घंटे में मिट्टी की रिपोर्ट तैयार कर किसानों को मिट्टी में मौजूद pH स्तर, नमक की मात्रा, NPK अनुपात और अन्य सूक्ष्म पोषक तत्वों की जानकारी देगी। इसके साथ ही, फसल के अनुसार आवश्यक प्राकृतिक उर्वरकों के सुझाव भी दिए जाएंगे। प्रारंभिक चरण में यह सेवा अंगुल जिले के 49 गांवों में दी जाएगी, जिससे किसानों को बेहतर फसल योजना और पोषण प्रबंधन में सहायता मिलेगी।
किसान बोले- बदली है सोच
कुलेई, तुकुड़ा और माझीका गांवों के किसानों –पितांबर प्रधान, प्रताप प्रधान और द्वारी प्रधान ने जिंदल फाउंडेशन की पहल की सराहना की। उन्होंने बताया कि कैसे उन्होंने कुरुक्षेत्र में प्राकृतिक खेती के प्रशिक्षण से नई बातें सीखी और अब देशी गायों के पालन को अपने घर का अभिन्न हिस्सा बना लिया है।
व्यापक विस्तार की योजना
शालू जिंदल ने मीडिया से बातचीत में कहा, “प्राकृतिक खेती की ‘बैक टू नेचर’ अवधारणा न केवल मिट्टी और फसल के लिए फायदेमंद है, बल्कि इससे कैंसर, पाचन संबंधी बीमारियों और तंत्रिका तंत्र की समस्याओं की रोकथाम भी संभव है।”
पहले चरण में यह योजना 2,000 से अधिक किसानों को लाभ पहुंचाएगी और इसके बाद इसे पूरे अंगुल जिले में जिला प्रशासन और राज्य सरकार के सहयोग से विस्तार दिया जाएगा। भविष्य में इस योजना को पूरे ओडिशा में लागू करने की योजना है और किसान समुदाय से प्राकृतिक खेती के एंबेसडर तैयार किए जाएंगे।

