अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के भारतीय सामान पर 50% टैरिफ लगाने के फैसले से देश के झींगा निर्यात पर गहरा संकट छा गया है। अमेरिका भारतीय झींगे का सबसे बड़ा बाजार है, और इस टैरिफ के बाद भारतीय उत्पाद अमेरिका में महंगे हो जाएंगे, जिससे निर्यातकों को भारी नुकसान होने की आशंका है। झींगा पालन से जुड़े किसान, मछुआरे और व्यापारी चिंता में हैं और सरकार से तत्काल राहत की मांग कर रहे हैं।
क्यों बढ़ी चिंता?
अमेरिका ने भारत पर 25% का अतिरिक्त टैरिफ लगाकर कुल शुल्क 50% कर दिया है, जबकि प्रतिस्पर्धी देशों जैसे इक्वाडोर (15%), इंडोनेशिया (19%) और वियतनाम (20%) पर कम टैरिफ है 810। इससे भारतीय झींगा अमेरिकी बाजार में महंगा हो जाएगा, जबकि प्रतिद्वंद्वी देशों का सीफूड सस्ता रहेगा। सीफूड एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (SEAI) ने चेतावनी दी है कि इससे भारत का 3 अरब डॉलर का सीफूड व्यापार खतरे में पड़ सकता है।
व्यापारियों की मांगें
झींगा निर्यातकों ने सरकार से इंटरेस्ट इक्वलाइजेशन स्कीम को फिर से शुरू करने और RoDTEP (रिफंड ऑफ ड्यूटी एंड टैक्सेज ऑन एक्सपोर्ट प्रोडक्ट्स) के तहत अतिरिक्त प्रोत्साहन देने की गुहार लगाई है। उनका कहना है कि बिना सरकारी सहायता के अमेरिकी बाजार में टिके रहना मुश्किल होगा।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर प्रभाव
कंपाउंड लाइवस्टॉक फीड मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (CLFMA) के चेयरमैन दिव्य कुमार गुलाटी ने चेतावनी दी है कि इस टैरिफ का असर केवल निर्यात तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि तटीय इलाकों के लाखों मछुआरों और किसानों की आजीविका भी प्रभावित होगी।
जानें क्या है समाधान?
विशेषज्ञों का सुझाव है कि भारत को अन्य बाजारों जैसे यूरोप, जापान और मध्य पूर्व में अपनी उपस्थिति बढ़ानी चाहिए। साथ ही, अमेरिका के साथ व्यापार वार्ता को तेज करने की जरूरत है ताकि टैरिफ में छूट मिल सके।
निष्कर्ष
अमेरिका के टैरिफ ने भारतीय झींगा उद्योग को गंभीर चुनौती में डाल दिया है। सरकार और उद्योग को मिलकर इस संकट से निपटने के लिए रणनीति बनाने की आवश्यकता है, नहीं तो इससे न केवल निर्यात, बल्कि लाखों लोगों की आजीविका भी प्रभावित होगी।

