इस उपलब्धि के पीछे वाणिज्य विभाग के अधीन कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) की सक्रिय भूमिका रही है, जो निर्यात को बढ़ाने के लिए विभिन्न योजनाओं और पहलों को लागू कर रहा है।
निर्यात संवर्धन के लिए प्रमुख पहलें:
एपीडा द्वारा देशभर में आधुनिक कृषि निर्यात इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास, नवीन व स्वचालित मशीनरी को बढ़ावा देने, उच्च गुणवत्ता एवं मूल्यवर्धित उत्पादों के उत्पादन के लिए कार्यबल को प्रशिक्षित करने जैसे प्रयास किए जा रहे हैं। साथ ही, वैश्विक बाजार की मांग को देखते हुए नए उत्पादों का विकास और निर्यातकों को बाज़ारों तक पहुंच दिलाने की दिशा में भी ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।
वित्तीय सहायता योजनाएं:
एपीडा वित्तीय सहायता योजना (FAS) के अंतर्गत देश के पंजीकृत निर्यातकों को निर्यात को बढ़ावा देने हेतु विभिन्न घटकों में आर्थिक सहायता प्रदान करता है, जिनमें शामिल हैं:
- निर्यात अवसंरचना (Infrastructure) का विकास
- गुणवत्ता सुधार (Quality Development)
- बाजार विकास (Market Development)
इन योजनाओं का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि भारत के उत्पाद अंतरराष्ट्रीय मानकों पर खरे उतरें और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में टिके रहें।
जानकारी और आवेदन:
वित्तीय सहायता से संबंधित विस्तृत दिशा-निर्देश और पात्रता की जानकारी एपीडा की आधिकारिक वेबसाइट www.apeda.gov.in पर “स्कीम” टैब में उपलब्ध है, जिससे निर्यातक लाभ उठा सकते हैं।
नीति स्तर पर प्रतिबद्धता:
इस संबंध में जानकारी कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री श्री रामनाथ ठाकुर ने लोकसभा में एक लिखित उत्तर के माध्यम से दी। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य सिर्फ मात्रा में नहीं, बल्कि गुणवत्ता और मूल्यवर्धन के साथ वैश्विक बाजारों में भारत की हिस्सेदारी को निरंतर बढ़ाना है।
भारत की कृषि निर्यात रणनीति न केवल देश की आर्थिक वृद्धि में योगदान दे रही है, बल्कि किसानों को वैश्विक बाजार से जोड़कर उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त भी बना रही है।

