NISAR यानी NASA-ISRO Synthetic Aperture Radar – एक ऐसा आधुनिक पृथ्वी निगरानी उपग्रह है जो अमेरिका की NASA और भारत की ISRO की संयुक्त ताकत से बना है। ये दुनिया का पहला उपग्रह होगा जो दोहरी फ्रीक्वेंसी रडार (L-बैंड और S-बैंड) तकनीक का इस्तेमाल करेगा।
इसकी खासियत है इसका 12 मीटर का मेश एंटीना जो बड़े छाते जैसा है, और यह SweepSAR तकनीक से 242 किलोमीटर चौड़े इलाके को स्कैन कर सकता है – वो भी 1 सेंटीमीटर तक की हलचल पकड़ने की क्षमता के साथ।
कैसे करता है NISAR काम?
NISAR में लगा Synthetic Aperture Radar यानी SAR तकनीक, रेडियो वेव्स के ज़रिए हर मौसम और हर समय पृथ्वी की स्कैनिंग करता है। चाहे अंधेरा हो, बादल हों या बारिश – इसका असर नहीं होता। यह 24×7 काम करता है।
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L-बैंड (NASA) – घने जंगलों और ज़मीन के अंदर तक देख सकता है
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S-बैंड (ISRO) – सतह की छोटी-बड़ी गतिविधियों पर नजर रखता है
NISAR के बड़े फायदे:
आपदा पूर्व चेतावनी
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भूकंप: टेक्टोनिक प्लेट्स की हलचल को ट्रैक करेगा
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ज्वालामुखी: लावा की गतिविधि पहले ही पकड़ लेगा
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भूस्खलन और सुनामी: समय से पहले चेतावनी देगा
जलवायु परिवर्तन पर नजर
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हिमनदों का पिघलना ट्रैक करेगा
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समुद्र के बढ़ते जलस्तर की भविष्यवाणी करेगा
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वनों की कटाई और वनस्पति की निगरानी
खेती और जल प्रबंधन
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फसलों की सेहत और मिट्टी की नमी का पता लगाएगा
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भूजल स्तर और जल स्रोतों की स्थिति की जानकारी देगा
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सूखे की स्थिति का अनुमान लगाएगा
आपदा राहत में तेज़ी
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बाढ़, तूफान या जंगल की आग की स्थिति में रियल-टाइम डेटा देकर राहत कार्यों में क्रांतिकारी मदद करेगा
भारत के लिए क्यों है NISAR बेहद अहम?
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हिमालयी क्षेत्र में भूकंप और भूस्खलन की चेतावनी
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खेती के लिए मिट्टी की नमी और पानी की उपलब्धता का डेटा
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जलवायु परिवर्तन पर सटीक जानकारी, जिससे नीति निर्धारण में मदद
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तटीय शहरों में समुद्र स्तर बढ़ने की चेतावनी
डेटा सभी के लिए फ्री होगा!
NISAR हर दिन लगभग 85 टेराबाइट डेटा भेजेगा, जो लाखों मोबाइल तस्वीरों जितना है। ये डेटा वैज्ञानिकों, सरकारों और आम नागरिकों के लिए मुफ्त उपलब्ध रहेगा।

