अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दबाव के बावजूद भारत ने रूस से तेल खरीदना जारी रखने का फैसला किया है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, भारतीय तेल कंपनियां अभी भी रूसी कच्चे तेल की खरीद कर रही हैं, क्योंकि यह आर्थिक और रणनीतिक दोनों दृष्टिकोण से फायदेमंद है।
ट्रंप के दावे और भारत का जवाब
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया था कि भारत ने रूस से तेल खरीदना बंद कर दिया है, जिसे उन्होंने “अच्छा कदम” बताया। हालांकि, भारतीय विदेश मंत्रालय और तेल कंपनियों ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि रूस से तेल आयात जारी है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने स्पष्ट किया कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बाजार में उपलब्ध सर्वोत्तम विकल्प चुनता है और अंतरराष्ट्रीय नियमों का पालन करता है।
क्यों जारी है रूस से तेल खरीद?
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आर्थिक फायदा: रूस भारत को ब्रेंट क्रूड की तुलना में 15-20% सस्ता तेल उपलब्ध कराता है, जिससे देश को सालाना अरबों डॉलर की बचत होती है।
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ऊर्जा सुरक्षा: भारत की 85% तेल जरूरतें आयात पर निर्भर हैं, और रूस से सस्ता तेल मिलने से मुद्रास्फीति नियंत्रण में रहती है।
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वैश्विक आपूर्ति में संतुलन: मार्च 2022 में जब ब्रेंट क्रूड की कीमत $137 प्रति बैरल तक पहुंच गई थी, भारत ने रूसी तेल खरीदकर वैश्विक बाजार को स्थिर रखने में मदद की।
अमेरिका का टैरिफ दबाव और भारत की रणनीति
ट्रंप प्रशासन ने भारत पर 25% टैरिफ लगाने की घोषणा की है, जिसमें पेट्रोलियम उत्पादों को छूट दी गई है। हालांकि, भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि वह अपने राष्ट्रीय हितों के आधार पर निर्णय लेगा और किसी बाहरी दबाव में नहीं झुकेगा।
रूस-भारत संबंधों पर प्रभाव
रूस भारत का लंबे समय से रणनीतिक साझेदार रहा है, जिससे न सिर्फ तेल बल्कि रक्षा उपकरणों की आपूर्ति भी होती है। भारत ने स्पष्ट किया है कि वह किसी तीसरे देश के दबाव में अपने संबंधों को प्रभावित नहीं होने देगा1।
निष्कर्ष
भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि वह रूस से तेल खरीदना जारी रखेगा, क्योंकि यह उसकी ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक हितों के लिए जरूरी है। अमेरिका के दबाव के बावजूद भारत ने यह साबित कर दिया है कि वह अपनी स्वतंत्र विदेश नीति पर अडिग रहेगा।

