भारत सरकार कृषि क्षेत्र को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी और टिकाऊ बनाने की दिशा में लगातार अग्रसर है। ब्रिक्स (ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका) संरचना के तहत भारत ने कृषि अनुसंधान और तकनीकी सहयोग को सशक्त करने के लिए कई प्रभावशाली कदम उठाए हैं। कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर ने आज लोकसभा में इस विषय पर जानकारी दी।
जलवायु-अनुकूल खेती से लेकर फसल विविधीकरण तक भारत की अगुवाई
भारत ने कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के माध्यम से जलवायु अनुकूल खेती, मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन, सटीक कृषि और फसल विविधीकरण जैसे क्षेत्रों में नवाचारों और सर्वोत्तम प्रथाओं को ब्रिक्स देशों के साथ साझा करने में नेतृत्व की भूमिका निभाई है।
ब्रिक्स कृषि अनुसंधान मंच की अहम भूमिका
साल 2021 में भारत की अध्यक्षता के दौरान शुरू किए गए ब्रिक्स कृषि अनुसंधान मंच (BRICS-ARP) के माध्यम से सदस्य देशों के बीच वैज्ञानिक विशेषज्ञता के आदान-प्रदान को बढ़ावा दिया गया है। यह मंच अनुसंधान संस्थानों के वर्चुअल नेटवर्क के रूप में काम करता है, जो संयुक्त परियोजनाओं, पायलट योजनाओं और प्रशिक्षण कार्यक्रमों को बढ़ावा देता है।
हाल ही में जुलाई 2025 में ICAR ने ब्राजील की एग्रीकल्चर रिसर्च एजेंसी EMBRAPA के साथ एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किया है। यह सहयोग सोयाबीन की जलवायु-अनुकूल किस्मों के विकास पर केंद्रित होगा।
कृषि निर्यात और वैश्विक साझेदारियों को बढ़ावा
भारत सरकार ने कृषि निर्यात बढ़ाने और किसानों की आय में वृद्धि के लिए वैश्विक साझेदारियों का लाभ उठाने पर विशेष जोर दिया है। कृषि निर्यात नीति के अंतर्गत शीतगृह, लॉजिस्टिक्स और भंडारण इन्फ्रास्ट्रक्चर को मजबूत किया जा रहा है ताकि फसलोपरांत नुकसान को कम किया जा सके और आपूर्ति श्रृंखला को सुदृढ़ किया जा सके।
भारत के राजनयिक मिशन विभिन्न देशों में क्रेता-विक्रेता बैठकों और व्यापार संवादों के आयोजन में सक्रिय हैं। इसके साथ ही कॉफी बोर्ड और चाय बोर्ड जैसे संस्थान प्रमुख निर्यात उत्पादों के अंतरराष्ट्रीय प्रचार में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
अंतरराष्ट्रीय मानकों पर जोर
निर्यातकों को स्वच्छता और पादप-स्वच्छता (SPS) मानकों के अनुरूप प्रशिक्षण और प्रमाणन में सहयोग प्रदान किया जा रहा है। इसके लिए ई-फाइटो प्रमाणन प्रणाली को अपनाया गया है, जिससे पारदर्शिता और दक्षता में सुधार हुआ है।
उत्पादों की ब्रांडिंग और मूल्यवर्धन की दिशा में पहल
- शीघ्र खराब होने वाले उत्पादों के लिए समुद्री प्रोटोकॉल विकसित किए गए हैं।
- पैकेजिंग और ट्रैसेबिलिटी को बेहतर बनाया जा रहा है।
- गुड एग्रीकल्चर प्रैक्टिस (GAP) जैसी प्रमाणन प्रणालियों को प्रोत्साहन दिया जा रहा है।
- किसानों और निर्यातकों को अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता प्रमाणपत्र दिलाने में मदद की जा रही है।
वैश्विक मंचों पर भारत की मजबूत उपस्थिति
भारत ने बायोफैच, गल्फूड, आहार, ऑर्गेनिक एंड नेचुरल प्रोडक्ट्स एक्सपो और इंडस फूड जैसे वैश्विक व्यापार आयोजनों में भाग लेकर भारतीय कृषि उत्पादों का वैश्विक प्रदर्शन किया है।
वर्ल्ड फूड इंडिया जैसे प्लेटफॉर्म निवेशकों को आकर्षित करने और भारतीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग को वैश्विक बाजार से जोड़ने के सशक्त माध्यम बन चुके हैं।
इन्फ्रास्ट्रक्चर में सुधार के लिए विशेष योजनाएं
सरकार ने कृषि-प्रसंस्करण क्लस्टर स्कीम, एकीकृत शीत श्रृंखला योजना, और अन्य पहल के माध्यम से कृषि प्रसंस्करण और संरक्षण क्षमताओं के निर्माण को प्रोत्साहित किया है ताकि निजी निवेश को बढ़ावा मिल सके और भारतीय कृषि उत्पादों की वैश्विक प्रतिस्पर्धा क्षमता में सुधार हो।

