इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ महाभियोग की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने आज संसद में इसकी औपचारिक घोषणा करते हुए जस्टिस वर्मा पर लगे आरोपों की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति के गठन का ऐलान किया। यह कदम जस्टिस वर्मा के दिल्ली स्थित आधिकारिक आवास से मार्च 2025 में जली हुई नकदी के बड़े ढेर मिलने के विवाद के बाद उठाया गया है, जिसके बाद से वह सुर्खियों में बने हुए हैं।
सुप्रीम कोर्ट के तत्कालीन चीफ जस्टिस संजीव खन्ना ने इस मामले में एक आंतरिक जांच समिति बनाई थी, जिसने जस्टिस वर्मा पर नकदी पर “नियंत्रण” रखने का आरोप लगाया था। इसके बाद चीफ जस्टिस ने प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति को जस्टिस वर्मा को पद से हटाने की सिफारिश की थी। हालांकि, जस्टिस वर्मा ने इस रिपोर्ट को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी, लेकिन शीर्ष अदालत ने उनकी याचिका खारिज कर दी और जांच प्रक्रिया को पारदर्शी बताया।
स्पीकर ओम बिरला ने कहा, “संसद भ्रष्टाचार के खिलाफ एकजुट है। हमने महाभियोग प्रस्ताव स्वीकार कर लिया है… लोगों को न्यायपालिका पर भरोसा बनाए रखना चाहिए।”
महाभियोग प्रस्ताव पर 146 सांसदों के हस्ताक्षर
स्पीकर ओम बिरला ने बताया कि उन्हें 31 जुलाई को भाजपा सांसद रविशंकर प्रसाद और विपक्ष के नेता राहुल गांधी सहित कुल 146 सांसदों के हस्ताक्षर वाला महाभियोग प्रस्ताव मिला था। इस प्रस्ताव में जस्टिस वर्मा को उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के पद से हटाने की मांग की गई है। प्रस्ताव संविधान के अनुच्छेद 124(4), 217 और 218 के साथ-साथ न्यायाधीश जांच अधिनियम, 1968 की धारा 3 के तहत लाया गया है।जांच समिति में कौन-कौन शामिल?
स्पीकर ने जस्टिस वर्मा के मामले की जांच के लिए एक तीन सदस्यीय समिति का गठन किया है, जिसमें निम्नलिखित सदस्य शामिल हैं:- जस्टिस अरविंद कुमार – सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश
- जस्टिस मनिंदर मोहन श्रीवास्तव – मद्रास हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश
- बीवी आचार्य – कर्नाटक हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता
क्या है पूरा मामला?
14 मार्च 2025 को जस्टिस यशवंत वर्मा के दिल्ली स्थित सरकारी आवास में आग लगी थी। आग बुझाने पहुंची दिल्ली फायर सर्विस की टीम को उनके स्टोर रूम में 500-500 रुपये के जले हुए नोटों के बंडल मिले थे। इस घटना के बाद जस्टिस वर्मा का तबादला दिल्ली हाईकोर्ट से इलाहाबाद हाईकोर्ट कर दिया गया।सुप्रीम कोर्ट के तत्कालीन चीफ जस्टिस संजीव खन्ना ने इस मामले में एक आंतरिक जांच समिति बनाई थी, जिसने जस्टिस वर्मा पर नकदी पर “नियंत्रण” रखने का आरोप लगाया था। इसके बाद चीफ जस्टिस ने प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति को जस्टिस वर्मा को पद से हटाने की सिफारिश की थी। हालांकि, जस्टिस वर्मा ने इस रिपोर्ट को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी, लेकिन शीर्ष अदालत ने उनकी याचिका खारिज कर दी और जांच प्रक्रिया को पारदर्शी बताया।
महाभियोग प्रक्रिया कैसे आगे बढ़ेगी?
- यदि जांच समिति आरोपों को सही पाती है, तो महाभियोग प्रस्ताव को संसद के दोनों सदनों में विशेष बहुमत (दो-तिहाई मत) से पारित करना होगा।
- इसके बाद राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने पर जस्टिस वर्मा को पद से हटाया जा सकेगा।
स्पीकर ओम बिरला ने कहा, “संसद भ्रष्टाचार के खिलाफ एकजुट है। हमने महाभियोग प्रस्ताव स्वीकार कर लिया है… लोगों को न्यायपालिका पर भरोसा बनाए रखना चाहिए।”

