भारत के कृषि इनपुट क्षेत्र को नई दिशा देने के उद्देश्य से आज इंडियन माइक्रो-फर्टिलाइजर्स मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (IMMA) द्वारा राजधानी दिल्ली स्थित इंडिया हैबिटैट सेंटर में दूसरे B2G राउंडटेबल का आयोजन किया गया। इस उच्चस्तरीय कार्यक्रम का विषय था — “Innovate, Regulate, Elevate: Shaping India’s Fertilizer Future”, यानी नवाचार, विनियमन और उन्नयन के ज़रिए भारत के उर्वरक क्षेत्र का भविष्य संवारना।
यह मंच सरकार, उद्योग और शोध संस्थानों के बीच सार्वजनिक-निजी संवाद को प्रोत्साहित करने के लिए तैयार किया गया, ताकि गैर-सरकारी सब्सिडी वाले उर्वरकों से जुड़ी गुणवत्ता, नवाचार और नियामक चुनौतियों पर गहन चर्चा हो सके और व्यावहारिक समाधान सामने आ सकें।
छह प्रमुख सत्रों में हुआ संवाद
इस राउंडटेबल को छह विषयगत सत्रों में विभाजित किया गया था, जिनमें हर एक सत्र ने भारतीय उर्वरक क्षेत्र के सामने खड़ी एक बड़ी समस्या पर ध्यान केंद्रित किया।
- गैर-सब्सिडी माइक्रोन्यूट्रिएंट और स्पेशलिटी उर्वरकों में नवाचार और गुणवत्ता नियंत्रण
- पुराने राज्य स्तरीय ग्रेड्स को सुधारने की आवश्यकता
- वैज्ञानिक आधार पर उत्पाद स्वीकृति की नई रूपरेखा
- IMMA सदस्य कंपनियों द्वारा नकली उत्पादों पर स्वैच्छिक रोकथाम
- स्मार्ट लेबलिंग, डिजिटल ट्रेसिंग और किसान जागरूकता अभियान
- उद्योग-स्तरीय SOPs और अनुपालन मानदंड
- सेंट्रल लाइसेंस पोर्टल और ईज़ ऑफ डूइंग बिजनेस सुधार
- ‘वन नेशन, वन लाइसेंस’ की दिशा में कदम
- राज्य व राष्ट्रीय स्तर पर एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म
- बायो-स्टिमुलेंट्स के लिए ज़मीनी हकीकतों के अनुसार नियमों का सामंजस्य
- राज्य स्तरीय लागूकरण में आ रही चुनौतियाँ
- NABL मान्यता की अस्थायी स्वीकार्यता और व्यापार में निरंतरता
- गैर-सब्सिडी उर्वरक कानूनों का अपराधमुक्तिकरण (Decriminalization)
- आवश्यक वस्तु अधिनियम से अलगाव
- लघु उल्लंघनों के लिए श्रेणीनुसार दंड प्रणाली
- गैर-सब्सिडी उर्वरकों के लिए उदार आयात-निर्यात नीति
- भारत को वैश्विक उर्वरक हब के रूप में स्थापित करना
- निर्यात में आ रही बाधाओं और नियमों की विषमता को दूर करना
नीति निर्माण के लिए साझा प्रयास
कार्यक्रम के उद्घाटन भाषण में IMMA के प्रतिनिधियों ने कहा कि आज जलवायु परिवर्तन, मिट्टी की घटती उर्वरता और वैश्विक खाद्य संकट के बीच एक संतुलित और सहयोगात्मक नीति ढांचे की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक है।
यह केवल चर्चा का मंच नहीं था, बल्कि भारतीय कृषि इनपुट नीति को गढ़ने का एक साझा आह्वान भी था। इसमें भारत सरकार के मंत्रालयों, नियामक एजेंसियों, प्रमुख उर्वरक निर्माताओं और अनुसंधान संस्थानों ने भाग लिया।
सभी सत्रों में हुई केंद्रित चर्चा, हितधारकों की प्रतिक्रियाएं और सहमति से बनी सिफारिशें अब सरकार को सौंपे जाने योग्य रूप में तैयार की जाएंगी। IMMA का उद्देश्य है कि इन विचार-विमर्शों के आधार पर ऐसे व्यावहारिक निर्णय लिए जाएं जो भारत के उर्वरक क्षेत्र को आत्मनिर्भर और वैश्विक प्रतिस्पर्धी बनाएँ।

