֍:क्या हैं लक्षण?§ֆ:सरसों की फसल में लाही कीट का खतरा मंडरा रहा है. ये छोटे भूरे या काले रंग के कीट होते हैं, जो पौधों का रस चूसकर उनके विकास को रोक देते हैं. लाही कीट के पौधों का रस चूसने से पत्तियां धीरे-धीरे मुरझाने लगती हैं और सिकुड़ जाती हैं. इससे फलियों में दाने भी नहीं बनते हैं और उत्पादन भारी मात्रा में कम हो जाता है.§֍:कैसे करें बचाव?§ֆ:लाही कीट की रोकथाम के लिए खेत में 5-6 पीली स्टिकी ट्रैप प्रति एकड़ खेत में लगाना सही माना गया है. ये ट्रैप कीटों को आकर्षित कर फंसा लेते हैं. वहीं, खेत में खरपतवार को समय-समय पर हटाने से लाही कीट को शरण नहीं मिलती और नुकसान खेत में नहीं पाता है. सरसों की फसल 40-45 दिन की हो और लाही कीटों का प्रकोप दिखाई दे तो, क्लोरोपायरीफॉस 20% EC 200 मिलीलीटर दवा को 200 लीटर पानी में घोलकर प्रति एकड़ खेत में स्प्रे के माध्यम से छिड़काव करें. इससे लाही कीट और अन्य कीटों को नष्ट किया जा सकता है.§֍:§रबी सीजन में सरसों की फसल एक प्रमुख तिलहनी फसलों में आती है, जो कि देश भर में कई किसान बोते हैं. लेकिन सरसों की फसल में काफी रोग लग रहे हैं. लगातार पड़ रही कड़ाके की ठंड और कोहरे के कारण सरसों की फसल पर कीट का भयंकर प्रकोप बढ़ते जा रहा है. इससे सरसों की फसल की पैदावार को लेकर किसान चिंतित नजर आ रहे हैं क्योंकि इन कीटों से उपज में काफी कमी आ सकती है.

