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Home कृषि समाचार

IARI की वो तकनीक, जिससे छोटे- मछोले किसानों की आमदनी में होगा दोगुना इजाफा

Fiza by Fiza
May 28, 2024
in कृषि समाचार
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IARI की वो तकनीक, जिससे छोटे- मछोले किसानों की आमदनी में होगा दोगुना इजाफा
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֍:आईएफएस मॉडल में फसल चक्र§ֆ:IARI पूसा, नई दिल्ली के एग्रोनॉमी विभाग के प्रधान वैज्ञानिक डॉ.राजीव कुमार सिंह के अनुसार, सही फसल चक्र अपनाने से मिट्टी की उर्वरता बनी रहती है और कीट और बीमारियों का प्रभाव कम होता है. किसान एक हेक्टेयर भूमि पर इस तकनीक को अपनाकर 0.7 हेक्टेयर में विभिन्न फसलों की खेती कर सकते हैं. जैसे बेबीकॉर्न, मक्का, सरसों, सूरजमुखी, टमाटर, भिंडी, आलू, प्याज आदि. इसके लिए एक अच्छा फसल चक्र अपनाना चाहिए, जिससे किसान की लागत कम हो और उत्पादन अधिक हो. किसान बची जमीन में डेयरी, मुर्गी, मछली पालन और बागवानी कर सकते हैं.

§֍:डेयरी, मुर्गी और मछली पालन एक साथ§ֆ:डॉ. राजीव के अनुसार, डेयरी के लिए किसान तीन गाय या भैंस पाल सकते हैं, जिनसे अधिक दुग्ध उत्पादन किया जा सकता है. मछली पालन के लिए 0.1 हेक्टेयर तालाब की आवश्यकता होती है, जिसमें विभिन्न प्रकार की मछलियों को पाल सकते हैं. मुर्गी पालन में भी विभिन्न नस्लों की मुर्गियां पालकर मुनाफा कमा सकते हैं. इसके अलावा एक हेक्टेयर भूमि में 4 बॉक्स रखकर शहद उत्पादन कर सकते हैं, जिससे अतिरिक्त आय होती है. वर्मी कम्पोस्ट बनाने के लिए पशुओं के मूत्र, गोबर, कूड़ा-कचरा आदि से जैविक खाद बनाकर लागत को कम किया जा सकता है. कृषि-वानिकी सहजन जैसे पौधे लगाकर साल भर में दो बार फल प्राप्त कर सकते हैं. बागवानी के तहत आम, अमरूद, अनार, नींबू आदि फलों के वृक्षों की खेती की जा सकती है. कृषि वानिकी में सहजन के पौधे लगाए जा सकते हैं, जो साल में दो बार फल देते हैं.

§֍:छोटे और मझोले किसानों को लाभ§ֆ:समन्वित कृषि प्रणाली (IFS) छोटे और मझोले किसानों के लिए बेहद लाभदायक है. इससे उनकी आमदनी में वृद्धि होती है और वे प्राकृतिक संसाधनों का सही उपयोग कर पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान दे सकते हैं. इस प्रणाली को अपनाकर किसान अपनी आर्थिक स्थिति को सुधार सकते हैं और एक सतत कृषि मॉडल स्थापित कर सकते हैं. समन्वित कृषि प्रणाली (आईएफएस) एक ऐसी तकनीक है जो छोटे और मझोले किसानों की आय बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकती है. आईएफएस की प्रमुख विशेषता यह है कि इसमें खेती, पशुपालन, मछली पालन, मुर्गी पालन और बागवानी जैसी गतिविधियां एक साथ की जाती हैं, जिससे लागत में कमी और मुनाफे में वृद्धि होती है.

§֍:एक खेत से आय के कई स्रोत§ֆ:डॉ राजीव कुमार सिंह बताते हैं कि इस प्रणाली में किसान फसलों के साथ-साथ मवेशी, मछली, मुर्गी और बत्तख पालन भी कर सकते हैं. इससे किसान को विभिन्न स्रोतों से दैनिक आय प्राप्त होती है, जो फसल पर निर्भरता को कम करती है. इससे प्राकृतिक संसाधनों का उचित उपयोग होता है. आईएफएस में सभी गतिविधियां एक-दूसरे से जुड़ी होती हैं. उदाहरण के लिए, पशुओं के गोबर का उपयोग खाद के रूप में किया जा सकता है, मछलियों के आहार के लिए मुर्गी और बत्तख के मल का उपयोग हो सकता है, जिससे बाहरी खाद और आहार की जरूरत कम होती है.
मधुमक्खी पालन से शहद का उत्पादन होता है, जो एक लाभकारी आय स्रोत है. वर्मी कंपोस्ट के माध्यम से जैविक खाद बनाई जा सकती है, जिससे रासायनिक उर्वरकों की जरूरत कम होती है. इसके आलावा बागवानी और कृषि वानिकी से आईएफएस तकनीक अपनाने से किसान न केवल अपनी आय बढ़ा सकते हैं बल्कि अपनी आजीविका को भी अधिक स्थिर और सुरक्षित बना सकते हैं. यह तकनीक खेती के जोखिम को कम करती है और प्राकृतिक संसाधनों का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करती है. इस प्रकार, आईएफएस छोटे और मझोले किसानों के लिए एक प्रभावी और लाभकारी प्रणाली है.

§खरीफ सीजन शुरू होने वाला है. IARI पूसा की समन्वित कृषि प्रणाली (IFS) को अपनाकर छोटे और मझोले किसान अपनी आमदनी पांच गुना तक बढ़ा सकते हैं. इस प्रणाली की मुख्य विशेषता यह है फसल के साथ डेयरी, मछली, बागवानी एक साथ कर सकते हैं. इस मॉडल में सभी घटक एक-दूसरे के पूरक होते और लाभ पहुंचाते हैं, जिससे लागत कम होती है और मुनाफा बढ़ता है. इसके अतिरिक्त, मवेशियों से दुग्ध उत्पादन, मछली, मुर्गी और बत्तख के अंडों और मांस की बिक्री से किसान को नियमित आय प्राप्त होती है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति सुदृढ़ होती है. सबसे पहले इस तकनीक में लागत में कमी होती है. मवेशियों का गोबर खाद के रूप में उपयोग होता है, जिससे रासायनिक उर्वरकों की जरूरत कम हो जाती है. फसलों के साथ-साथ दुग्ध उत्पादन, मछली पालन, मुर्गी पालन आदि से अतिरिक्त आय होती है. इस प्रणाली में सभी गतिविधियां प्राकृतिक चक्र को बनाए रखती हैं, जिससे पर्यावरणीय संतुलन बना रहता है.

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