֍:सीएम सैनी ने कही ये बात§ֆ:सीएम नायब सिंह सैनी ने बताया कि कुछ ही वर्षों में पराली एक बड़ा मुद्दा बन गया है. इससे स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है. इस मुद्दे को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट और वायु गुणवत्ता आयोग इसकी निगरानी कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि हरियाणा के किसान उन्नत तकनीक अपना रहे है और फसल अवशेष को नष्ट करने के लिए नए कृषि उपकरणों का उपयोग करने की पूरी कोशिश कर रहे हैं. पिछले कुछ सालों में केंद्र और राज्य सरकार ने पराली को नष्ट करने के लिए मशीनरी पर सब्सिडी दे रही है. बता दें कि साल 2023-24 की तुलना में पराली की घटनाओं में 39 फीसदी की कमी आई है. §֍:10 मशीनों पर मांगी GST छूट§ֆ:सीएम सैनी ने वित्त मंत्रालय से कृषि मशीनों जैसे रोटावेटर, डिस्क हैरो, कल्टीवेटर, जीरो ड्रिल, सुपर सीडर, स्ट्रॉ बेलर, हे रेक, स्लेशर, रीपर बाइंडर और ट्रैक्टर माउंटेड स्प्रे पंप पर जीएसटी छूट देने का अनुरोध किया है. उन्होंने कहा कि अगर केंद्र सरकार छूट देती है तो इससे किसान इन तकनीकों को अधिक व्यापक रूप से अपनाने के लिए प्रोत्साहित होंगे, जिससे पराली जलाने से होने वाले वायु प्रदूषण को रोकने में मदद मिलेगी.§हरियाणा में पराली की परेशानी हर साल देखने मिलती है. इसको लेकर अब हरियाणा सरकार सतर्क हो गई है. राज्य के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने राज्य के किसानों के लिए केंद्र सरकार से एक बड़ी मांग की है. सरकार ने फसल अवशेष प्रबंधन यानी पराली को नष्ट करने में इस्तेमाल होने वाले 10 कृषि मशीनों पर GST की छीट की मांग की है. सीएम सैनी ने इसको लेकर केंद्रीय वित्त मंत्री और कॉरपोरेट मामले की मंत्री निर्मला सीतारमण और केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान को पत्र लिखा है.

